Sunday, September 24, 2017



लाल किताब और प्राचीन उपायों से कष्ट निवारण


लाल किताब और प्राचीन उपायों से कष्ट निवारण

प्राचीन ज्योतिष में ग्रहों को तथा बीमारी को शन्न करने के लिये जड़ी बूटियों का प्रयोग किया गया है। वैसे तो कुछ चीजें ऐसी हैं जिसके प्रयोग से बीमारी समाप्त होती हैं। जैसे अगर बिल्वपत्र और काली मिर्च दोनों पीसकर सुबह शाम लगातार दो महीना छानकर पीने से मधुमेह (शुगर) की बीमारी ठीक हो सकती हैं। अगर गरमी के मौसम में पीया जाये तो गरमी नहीं लगेगी।

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अपने प्यार को पाने का टोटका

लाल किताब के चमत्कारी टोटके और उपाय

लाल किताब में लिखा है कि अगर किसी का बुध खराब है तो वह फिटकरी से दाँत साफ करे। फिटकरी भी बुध हैं और दाँत भी बुध है इसलिए बुध को प्रदान करता है। पीपल में बहुत ऑक्सीजन होती हैं बाकी पेड़ प्राप्त को कार्बनडाइऑक्साइड छोड़ते हैं लेकिन पीपल २४ घण्टे ऑक्सीजन छोड़ता रहता है। अगर किसी को टोबी हो या ठिल की बीमारी हो और वह जातक ३.४ पीपल के के नरम नरम पत्ते खाया करें या पीपल की की नरम-नरम टहनी खाया करे तो उसके अन्टर बीमारी को रोकने की प्रतिरोधक शक्ति पैदा हो सकती है और दिल तथा टीबी दोनों बीमारियौं ठीक होने की सम्भावना हो सकती हैं।

इसके साथ और भी कोई बीमारी होती है तो वह भी ठीक हो जाती है। पीपल को लाल किताब ने ब्रहमाजी माना है जो जन्म देने के स्वामी हैं। अगर किसी जातक के सन्तान नहीं होती वह भी भगवान का नाम लेकर रोज खाना खाया करे तो अवश्य सन्तान होगी। इसलिए पीपल को इतना महत्व दिया गया है। लाल किताब में मंगल और बुध दोनों को एक जगह होने से खराब माना है गंगा जल का प्रयोग करें तो ठोनों ग्रह शान्त रहेंगे। बरगद का पेड़ जिसे पंजाब में बरोटा कहा जाता है उस पर जल दूध चढ़ाकर उसकी मिट्टी से माथे पर तिलक लगाया जाये तो विशेषकर सूर्य 3भीर चन्द्रमा अच्छT फल ठेयो इसके पीछे यह राज है कि बरगद के पेड़ के पास जाकर उसके पत्ते तोड़ने से जो दूध निकलता है यदि, उसे पत्माशों में लगाकर खा लिया जाये तो पताशा बहुत ताकतवर होता है और सब प्रकार की बीमारी रोकने की उसमें शक्ति होती है।

कुछ लोग इन से छोटी-छोटी नरम दाटु खाकर भी पानी पीते हैं। उसकी दवाई भी बनायी जाती है। इसलिए इसका महत्व लाल किताब ने दिया हैं। जिसकी कुण्डली में बुध शनि एक साथ बैठे हैं वह आम का पेड़ धर्मस्थान में लगाये यह काम परोपकार का है। वृक्ष से छाया, लाकडी और ऑक्सीजन प्राप्त होती है तथा बरसात भी होने में वृक्ष सहायक होता है।

धर्म स्थान में जो भी जायेगा उसे खाने को मिलेगा। हर पूर्णमासी/ संक्रान्ति या शुभ ठिन पर एक पीला सब्बानी वाला पेठा (कडू) लंगर में दिया जाये तो घर में बीमारी परेशानी से बचाव होगा। लंगर में दिया गया दान सभी लोग खा सकते हैं जिसमें सेवा करने से ग्रह शान्त होते हैं कयोकि इस संसार में जितने-जीवन जन्तु हैं उन सबको भगवान ने बनाया है और भगवान के बनाये प्राणी की सेवा भगवान की भरकर शनिवार के ठिन पीपल या बरगद के पेड़ के नीचे या चींटियों की जगह पर मुँह खुला रखकर रखें, जिससे चींटियाँ खा सके| यह बड़ा लंगर है। यन का काम करेगा|

जब भी घर बनवायें 3भपने घर में कच्ची जमीन जरूर रखें जिससे शुक्र का प्रभाव ठीक रहेगा। अगर घर का पूरा स्थान पक्का हो तो अपने घर में गमला रखें, उसमें तुलसी भी लग सकती है। रोज़ नहा कर
जल चढ़ाएं तथा २.३ पत्ने रोज़ रवाया करें।

केतु यदि बारहवें घर में हो तो लाल किताब में लिखा है कि जानक अपना अँगूठा मीठे दूध में डालकर चूसा करे तो केतु ठीक फल देगा। जातक का अँगूठा मनुष्य के दिमाग और तन्दुरुस्ती से सम्बन्धित है। जितना बड़ा अँगूठा होगा उतना अच्छा दिमाग होगा। अँगूठा चूसने से अँगूठा थोड़ा जरूर बढ़ेगा और जितना भी बढ़ता जायेगा उतना फल कुछ न कुछ जरूर ठेगा। जब किसी बच्चे को अपनी किस्मत अच्छी बनानी होती है तब वह लगातार १५,२० साल मेहनत करके पढ़ता है फिर कामयाब होता हैं। उसी तरह से किस्मत को बदलने
के लिये बहुत त्याग-तपस्या एवं योग करना पड़ता है।

अगर किसी को गुर्ट की बीमारी हो जाती है तब जातक अपने दोनों पैर के अँगूठे में मोटी से मोटी चाँदी की अँगूठी पहने। वहाँ पर चाँदी पहनने से गुर्द की बीमारी ठीक होगी। अब अगर देखा जाये तो जातक का पैर केतु है और चन्द्रमा चाँदी। चन्द्रमा से केतु का बुरा प्रभाव ठीक होता है। पैर के तथा हाथ के अँगूठे में जीवन शक्ति होती है और उसमें चाँदी धारण करने से केतु के बुरे प्रभाव कम हो जाते हैं।

पहले की औरतों के पैर के जोड़ों में दर्द इस कारण नहीं होता था क्योंकि वे अपने पैरों में
शान्ति बनी रहती है।

चमत्कारी उपाय कुछ लोग अपनी कुण्डली या हाथ दिखाने के बाद यह जानना चाहते हैं कि उनके जीवन में जो कष्ट या परेशानी लिखी है, वह कष्ट या परेशानी कैसे दूर हों। इसके लिए उप्योतिष शास्त्र में जप, तप, व्रत, हवन, यज्ञ लिखा है। कुछ लोग करते हैं लेकिन उसके बाद भी पूरा लाभ नहीं मिल पाता है और कई जगह पर लाभ गंगा जी नहाने से या पूजा पाठ करने से नहीं होता है। कर्म काण्ड करवाये जायें जिससे अधिक से अधिक लाभ हो सके। एक समय था कि गंगा जी में नहाने से किस्मत बदल जाती थी | सत्यनारायण भगवान का पाठ करने और हवा यान करवाने से, दान करने से क्रिस्मत बदलती थी और लाभ होता था। लेकिन अब उस रहस्य को ढूंढना होगा कि कौन से कारण हैं जिनके कारण यह उपाय अपना फ़ल नहीं दिखा पाते हैं। एक दुकानदार हम पिछले कई वर्षों से जानते है|

वह सदा अपने ग्राहक भी उसकी दुकान पर जाता है, वह ठगा जाता है। अब अगर वह पूजा पाठ कर भी लेता है तो क्या भगवान यह नहीं जानते हैं कि वह आदमी सबको ठगता है। अगर कोई किसी से अधिक पैसा लेकर सामान खराब ठेता है तो धीरे-धीरे सभी लोगों को यह पता चल जाता है और कोई कहता भी हैं कि मुझे उनकी दुकान से सामान खरीदने जाना है तो लोग मना कर देते हैं कि यह इनसान ठग है। धीरे-धीरे वह आदमी बदनाम हो जाता है और उसकी दुकान पर लोग आना-जाना बन्द कर देते हैं वह पूरा का पूरा घाटा खाना शुरू कर देता है।

ऐसे व्यक्ति को चाहिए कि चाहे वह हवन यज्न दान दक्षिणा भी न करें लेकिन जो भी व्यक्ति उसकी दुकान पर आये उससे सही पैसा लेकर सही सामान टे तो ग्राहक स्वयं वापस आयेगा और दो चार अन्य व्यक्तियों को और साथ लेकर आयेगा। अगर सही सामान बेच कर सही पैसा लेखागा तो उसके दवारा किया गया दान पुण्य हवन यज्ञ्न भी लाभदायकः होगा। अन्यथा दान पुण्य से कुछ प्रतशित फ़ायदा हो सकता है लेकिन पूरा लाभ होना कठिन होगा। कुछ लोग मजदूरों से काम नहीं देते हैं या मजदूरी काट लेते हैं। फ़िर पण्डित के पास जाते हैं या तान्त्रिक के पास जाते हैं, उपाय करवाते हैं। उपाय करने से उनके मन की तसल्ली हो जाती है, लेकिन ग्रह तो तभी ठीक होंगे जब एक मजदूर से काम करवा कर उसकी इज्जत व सम्मान के साथ उसकी मजदूरी दी जाये। कुछ लोग पूजा पाठ बहुत करते हैं। इन्सानियत से तो उन्हें प्यार नहीं होता। इनसान को जन्म देने वाला इनसान है जिसकी गोद में जन्म लेकर बढ़ा पला हैं, लेकिन फिर भी उनसे ईष्या करता है तो पाठ करने के कुछ प्रतशित लाभ तो होगा लेकिन पूरा लाभ प्राप्त नहीं होगा। जो मांस, शराब, अण्डा खाते-पीते हैं उनकी बुद्धि खराब हो जाती है और इसके लिए अधिक पैसे की जरूरत पड़ती है और अधिक पैसे के लिये इनसान गलत रास्ता अपनाता है या अपने परिवार का पालन न करके सिर्फ अपने खाने-पीने पर अधिक धयान देता है। जो इनसान अपने परिवार का पालन नहीं कर सकता है, वह हवळन यज्ञ करके बहुत कम लाभ प्राप्त होने पर मेहनत करके अपने परिवार का पालन करते हैं तो जो भी धार्मिक कार्य करेंगे भगवान की कृपा उनको अवश्य प्राप्त होगी। कुछ लोग अपने आई, बहळन, रिश्तेदार का हिस्सा हड़प कर लेते हैं।

बाद में पणेिंडलों या सन्नों के पास घूमते हैं। अगर ऐसे लोग गंगाजी नहा भी लेते हैं तब गंगा माता भी जानती हैं कि वह गरीबों का हिस्सा मार कर आया है। गंगा जी नहाने से लाभ बहुत ही कम होगा और फ़िर बोलेंगे कि हमने सब कुछ उपाय कर लिया लेकिन लाभ नहीं हुआ। दान पुण्य के दवारा उनका पालन हो सकता है लेकिन जब जातक ने इतना बड़ा अपराध किया है तो जरूरी नहीं कि दान पुण्य करने से वह मुकदमे से छूट जाये। हाँ, दान पुण्य करने से उसके परिवार को कुछ न कुछ राहत अवश्य मिलेगी। किन्तु अधिक नहीं।

कुछ लोग कामकाज या मेहनत तो करना नहीं चाहते सिर्फ उपायों के दवारा अपनी किस्मत बदलना चाहते हैं और जब उपाय करने से लाभ नहीं मिलता तब कहते हैं कि उपाय में कोई शक्ति नहीं हैं या ज्योतिष गलत है। कुछ लोग दान पुण्य करते हैं लेकिन उधार लेकर करते हैं और जिसका ले लिया उसका वापस नहीं किया किन्तु वह लोया पैसा वापस नहीं दिया। कुछ करते हैं। लेकिन जिसका भी पैसा
करते हैं, ऐसे लोग जितना मज़ों सुधारेंगे लाभ बहुत कम होगा।

कुछ लोग कहते हैं कि वे किसी को दान-दक्षिणा नहीं लेते हैं। न ही किसी से लेकर कुछ खाते हैं। अगर उनको कोई कुछ खाने-पीने को टेला है तब भी नहीं खाने-पीने हैं। लेकिन अगर किसी का पैसा ले लेंगे या सामान ले लेंगे, उसे वापस नहीं करेंगे। कुछ लोग जो ठान ठक्षेिपणा करेंटो उस मकान पर अपना नाम लिखवा देते हैं। उनके अन्दर नहीं हैं। भगवान कहते है कि में उसको पसन्द करता हूँ जिसका मन स्वच्छ और साफ हैं। रामायण में तुलसीदास जी ने लिखा है कि भगवान राम ने शबरी को अकिल का उपदेश देते हुए कहा था कि: सप्तम सो मोहि भय जग देखे। मो सो अधिक सन्त कर लेखे। अथत इस संसार में जितने जीव जन्तु हैं उन सब में मेरी हो ज्योति जलती है। और जिस दिन में मनुष्य के शरीर से अपनी उयोनि खींच लेना हूँ उस समय इनसान मर जाता है। इसलिए अगर कोई इनसान के साथ धोखा-धड़ी, ठगी करता है तो वह उस इनोसान से न करके मेरे से धोखा करता है। श्रीमद भगवद गीता में कृष्णजी ने बताया कि इस संसार में सभी प्राणियों में आत्मा के रूप में में ही कल्याण की भावना रखते हैं, उनसे भगवान खुश होते हैं। गुरु नानक देव जी महाराज ने गरीबों की मदद के लिए दिया। उन्होंने कोई जात-पात नहीं देखी, जो भी गरीब व दुखी थे
कहीं भी धर्मस्थान में जाने की अधिक आवश्यकता नहीं है।
नाः---म-न-यान- रचने से ग्रहों का उपाय करने से वस्तु की शान्ति करवाने से वही लोग पूरा लाभ उठा सकते हैं जो अपने दोन-ईमान पर खडे हो हक व हलाल की कमाई खाते हैं। जन-जन के कल्याण की भावना रखते हैं और उसकी हवन यज्न करवाने से लाभ होगा। जो अपने जाति धर्म के नाम 3भन्टर परमात्मा का अंश ठेखती हैं। राष्ट्रपति चाहते हैं कि उनके ग्रह शान्त हों तो वे अपने देश की जनता को
अपनी सन्तान समझें और उनके लिए होगा। अगर कोई मजदूर जिसको रोज के ८०,९० रुपये मिलते हैं, एक
अन्धो को रोटी खिला टेना है त्नो भी उसको उतना ही लाभ होगा जितळना हवन यज्ञ करने से होता है क्योंकि उसका सामथ्र्य ही बहुत कम है। कुछ लोग अपने आस-पास के लोगों के, रिश्तेदारों दवारा टी गयी चीजों का उपयोग नहीं करते कि कहीं कुछ करके अर्थात भूत-प्रेत या जादू-टोना करके तो नहीं दे रहे हैं। भूत-प्रेत या
दैवीय शक्ति किसी के हाथ की कठपुतली नहीं होती जिस प्रकार अच्छी विदया प्राप्त करने के त्रिष्ये १०,१५१ साली पठ्ठना पडता हे उसी प्रकार भगवान को खुश करने के लिये जन-जन का कल्याणा तथा त्याग-तपस्या करनी होती है तब भगवान की कृपा प्राप्त होती है। कहने का मतलब है कि इस संसार में वही महान हैं जिसके पास कोई शक्ति है और जब व्यक्ति ने इतना त्न्या-त्नप-या करके शक्ति प्राप्त की है तो वह उसे अच्छे काम में लगायेगा जिससे गरीबी दूर हो, बीमारी दूर हो ना कि अपने जीवन की मेहनत किसी को दु:ख, कुछ पण्डित लोग भी लोगों को अमित कर देते हैं कि आपके घर पर किसी ने कुछ कर दिया है।

यह बनाने से लोग पण्डित से उपाय करवायेंगे और उनकी जेब में भी कुछ जायेगा ऐसे पण्डित को भी भगवान से डरना चाहिए कि जातक को सही रास्ते पर लगायें जिससे वह भगवान खुश होंगे। किसी को गलत उपाय बताने या अमित्न करने से बताने वाले के खुद के ग्रह खराब हो जायेंगे और जातक कष्ट में आ जायेगा। आस पड़ोस, परिवार में झगड़ा-लड़ाई न करके प्यार मुहब्बत के साथ रहने से भगवान की कृपा होती है। बेईमानी, पाखण्ड का कारक राहु है और अब जातक जितना ये सब करता है तब राहु खराब होकर जातक को नष्ट कर देते हैं। आम जनता शनि एवं पहले उठे और यह देखें कि उठने समय दायें नाक से ३वास आ रहा है अथवा बायें नाक से। अठार दायें नाक से आा रहा है तब भगवान से प्रार्थना करें कि 'हे भगवान आज मेरी आयु में से एक दिन समाप्त हो रहा है इसलिए मेरा आज का टिन सुख शान्ति से बीते और यह आपको कृपा होगी, क्योकि इनसान लो कुछ नहीं कर सकता है, नौ महीने रहता है जब उसकी हिम्मत कहाँ होती हैं।
जब बीमार हो जाता है तब वह करवट भी नहीं पलट सकता है और न अन्न खा सकता है। गरमी के मौसम में पंखा कूलर लगाकर ठण्डा करना चाहता है। एक कमरा कठिनाई से ठण्डा होता है लेकिन अगर भगवान की कृपा होती है तो १० मिनट में वर्षां होकर ठण्डी हवा चलने लगती हैं और सब जगह ठण्डापन हो जाता है। इसलिए गुरु नानक देव जी महाराज ने लिखा है कि भगवान् की मर्ज़ी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता है। हे भगवान, हम आपकी सन्तान हैं। मेरे ऊपर अपनी कृपा बनाये रखें क्योंकि जो कुछ मेरे पास है वह आपका दिया हुआ है। और मेरे हाथ से किसी का बुरा न हो और इतनी शक्ति दें, जिससे में अपनी मेहनत से कमाकर अपने परिवार का पालन कर सकूं।' फिर जिस नाक से ३वास आ रहा है वही हाथ अपने सिर पर फेर लें और वही पैर जमीन पर पहले रखें। फिर अपना घर का सारा काम करके तुलसी को जल चढ़ाकर ३,४ पत्ते तुलसी के खाकर जल पीयें। अपने घर में तुलसी का पौधा अवश्य लगायें क्योंकि तुलसी लक्ष्मी माता की बहन है और तुलसी की हवा घर में जहाँ पर जाती हैं, पवित्र हो जाता है। और सब बीमारी दूर हो जाती है। घर में तुलसी ऐसी जगह लगानी चाहिए जहीं उसे अठर-सन्मान प्राप्त हो।
नहाने के बाद में सूर्य भगवान तथा शंकर भगवान को जल चढाये तथा रूद्राक्ष का एक ठाना उाले में अवश्य धारण करें और रोज शंकर भगवान का जप करें कि हे भगवान आप दवारा दिया यह रहें | किमी गरीब कन्या की मदद करने से सारे कार्य होती हैं |

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