Friday, December 11, 2015

Wealth Signs Indian Palmistry

Wealth Signs Indian Palmistry

Money problems are part of life. Charles Dickens' character, Mr. Micawber, expressed the matter very well: "Annual income twenty pounds, annual expenditure nineteen six, result happiness. Annual income twenty pounds, annual expenditure twenty pounds ought and six, result misery."2 Since no one ever has enough, you will be asked many questions about this subject. Money is indicated in three ways on the palm (figure 48). Inherited money is shown by a small line between the third and fourth forgers that curves part of the way around the third forger. Unfortunately, this line is not very helpful. It gives no indication as to when the money will be inherited or how much money is involved. It is simply an indication that the person has, or will, inherit money.


Easy money is shown by a triangle on the inside of the life line. One side of it is made up by the life line, and the other two lines are minor lines. This triangle always indicates a large amount of money.

 However, the term "large" depends on what the person considers to be a large amount. A large lotto win, for instance, would be shown as a triangle on the life line. A win of a thousand dollars on a horse race would probably not be shown, because that is not considered a large amount of money these days. However, if you were living on the streets and suddenly won a thousand dollars, that might very well be indicated on the palm, since you would consider that to be a fortune.

Most people have to earn their own money. Their potential is indicated by a small triangle in the center of the hand. Two sides of this are created by the destiny and head lines, and a minor line on the little finger side of the palm creates the third side. This triangle is extremely small and shows the person's potential. It does not necessarily mean that he or she will earn that amount of money over a lifetime.

First, we have to see if the person is motivated to achieve it. We determine this by looking at the top two phalanges of the thumb to see if willpower and logic are roughly even. If the second phalange (logic) is much longer than the tip section, the person is probably not going to make much money, since he or she will think, and think, and then think some more. This person is likely to achieve very little.

We also have to look at the head line to see if the person has the necessary brain power to make much money. Remember that a short head line does not mean a lack of intellectual ability. It denotes a quick, sharp, and often highly shrewd thinker. Someone lace this could well make a great deal of money, compared to someone with a long head line who enjoys learning for its own sake.

We also need to see if the money triangle is open or closed. If it is closed, the person is able to hang on to some of the money after earning it. If it is open, most of the money will disappear.


A thin line that bisects the minor line (third side of the money triangle) indicates financial difficulties at different times. However, this is not necessarily a bad thing because it can be a spur to progress. This person often takes two steps forward, and then slides back one step. Ultimately, this person may very well be extremely successful, but will be a plodder rather than a "whiz kid."

Sometimes you will see a double money sign. In this case, there are two minor lines that each join the destiny and head lines, creating a small triangle inside a larger one. This is a sign that the person will make money, and will then have investments which create additional money. It is a sign of both earned and unearned income. 

 I always tell my clients that the amount of money indicated is a potential, and it is up to them to achieve it. 

Monday, December 7, 2015

हस्तरेखा में हृदय रेखा का परिचय

हृदय रेखा का प्रभाव





हथेली पर मौजूद हर रेखा अपने आपमें एक प्रकार के जीवन शक्ति प्रवाह की परिचायक होती है, तथा यही रेखायें व्यक्ति के जीवन की सूक्ष्मतर स्थितियों का संकेत करती हैं। इन्ही रेखाओं के दोषी होने पर व्यक्ति के जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ता है। स्पष्ट और अटूट रेखाएँ व्यक्ति के जीवन के सफलता को प्रमाणित करती हैं। हस्त रेखाएँ पूरे जीवन की व्याख्या कर देती हैं। हथेली की प्रत्येक रेखा व्यक्ति के किसी न किसी घटना को स्पष्ट करती है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि घटनाओं की निश्चित् तिथियाँ नहीं बतायी जा सकती पर स्थान, नाम आदि बताना सम्भव है।  

गहन अध्ययन एवं अनुभव के आधार पर घटित घटनाओं को ठीक पास में लाया जा सकता है। अधिक अभ्यास हो जाने के बाद आप घटना के लिए जो तिथि निर्णय करेंगे तो आम तौर पर उस तिथि पर वह घटना घटेगी, यह परिश्रम अध्ययन और फलादेश की प्रमाणिक युक्ति है। यह भी ध्यान रखना होता है कि मस्तिष्क के गुणों, दोषों के अनुसार रेखायें परिवर्तित होती रहती हैं।  

हृदय रेखा 16 प्रकार की मानी गई हैः-ंउचय जगती , राजपददात्री , कुमारी , गान्धारी , सेनानित्वप्रदा , दरिद्रकारी , धृती , वासवी , चम्पकमाला , वैश्वदेवी , त्रिपदी , महाराजकरी , रमणी , चपलवदना , कुग्रहणी आदि। कभी-ंउचयकभी हथेली पर बहुत अधिक और कभी-ंउचय2 बिल्कुल कम रेखाएँ देखने में आती हैं। जीवन रेखा एक ऐसी रेखा है जो प्रत्येक मनुष्य के हथेली में होती है, अन्य रेखाओं की अनुपस्थिति में दूसरी छोटी रेखाओं द्वारा पूर्ण की जाती है।  

प्रत्येक मनुष्य के हाथ में कुछ गौण और कुछ मुख्य रेखायें होती हैं। ये रेखायें मनुष्य के चारित्रिक गुणों को उत्पन्न करने वाली होती हैं। अतः इनकी उपस्थिति या अनुपस्थिति भी हो सकती है।

प्रत्येक मनुष्य के हाथ में कुछ गौण और कुछ मुख्य रेखायें होती हैं। ये रेखायें मनुष्य के चारित्रिक गुणों को उत्पन्न करने वाली होती है। अतः इनकी उपस्थिति या अनुपस्थिति भी हो सकती है।

मुख्यतः रेखायें चार प्रकार की होती हैं।

1. गहरी रेखा-ंउचय यह रेखा पतली होने के साथ-ंउचय2 गहरी (मोटी) भी होती है।
2. -सजयलुआ रेखा-ंउचय यह रेखा शुरु में मोटी होती है तथा ज्यों-ंउचयजयों आगे ब-सजय़ती जाती है, त्यों-ंउचयत्यों पतली होती जाती है।
3. पतली रेखा-ंउचय वह रेखा शुरु से आखिर तक एक आकार (पतली) में होती है।
4. मोटी रेखा-ंउचय यह रेखा चैड़ायी लिये होती है और पूर्णतः स्पष्ट होती है।

मनुष्य के हाथ में गहरी, स्पष्ट और सरल रक्त वर्ण की, हृदय रेखा व्यक्ति को मानवीय गुणों से सम्पन्न करती है। दाहिने हाथ की हृदय रेखा जितनी ज्यादा साफ और गहराई लिये होगी व्यक्ति उतना ही अधिक सरस, न्यायप्रिय तथा परोपकारी माना जाता है। किन्तु हृदय रेखा यदि कटी, टूटी या अस्पष्ट होगी, तो व्यक्ति देखने में, चाहे जितना सज्जन क्यों न हो वह दिल से पापी और कलुषित होगा। ऐसा व्यक्ति असभ्य, बद्चलन चरित्रहीन विवेकशून्य आदि अवगुणों वाला होगा।  

ऐसे व्यक्तियों का आसानी से यकीन करना अपने आप को धोका देने के बराबर है। इसका हृदय से सीधा सम्बन्ध माना गया है। जो कि जीवन का प्राथमिक अंग है, जहां से संचालन का नियन्त्रण होता है।


निर्दोष और सबल हृदय रेखा स्वस्थ्य हृदय की परिचायक है। करीब एक सौ हाथों में एकाध हथेली ही ऐसी होती है जिसमें हृदय रेखा का अभाव होता है। हथेली में इस रेखा की अनुपस्थिति व्यक्ति के अमानवीय प्रवृत्तियों को स्पष्ट करती है। यह रेखा व्यक्ति को दुर्गुण एवं गुण दोनों प्रदान करती है। प्राचीन हस्तरेखा ग्रन्थों के अनुसार हृदय रेखा तीन स्थानों से शुरु होती है।  

1. शनि और गुरु पर्वत के मध्य से 2. गुरु पर्वत के केन्द्र से 3. शनि पर्वत के केन्द्र से।

1.अ. शनि गुरु के मध्य से-ंउचय ऐसे व्यक्ति व्यवहार कुशल और स्नेही होते हैं। इनका प्रेम जीवन की प्राथमिकता पूर्ति के बाद शुरु होता है।

1.ब. गुरु पर्वत के केन्द्र से-ंउचय यह हृदय रेखा मनुष्य के प्रणव सम्बन्धों और स्नेह को आदर्शवादी आधार प्रदान करती है। ऐसे व्यक्ति विषम परिस्थिति एवं आपत्ति काल में भी सम्बन्धों का निर्वाह करने में सफल होते हैं। 
1.स. शनि पर्वत से-ंउचय यह हृदय रेखा स्वार्थ भावना उत्पन्न करती है तथा ऐसे लोग वासना के प्रति यकीन रखते हैं। ऐसी भावना रखते हैं कि जिसमें अपना स्वार्थ -हजयलकता हो और प्रेम वासना अधिक पायी जाती है, इसलिए
प्रेम सम्बन्धों में स्वार्थी होते हैं।

2.अ. मस्तिष्क रेखा के निकट से आरम्भ होने वाली हृदय रेखा असाधारण रूप से दीर्घ हो तो ईष्र्या की भावना उत्पन्न करती है तथा प्रेम सम्बन्धों में ये असफल होते हैं।

2.ब. अधिक दीर्घ हृदयरेखा भावनात्मक प्रवृत्ति को उत्पन्न करने वाली होती है, तथा छोटी हृदय रेखा अच्छी मानी गयी है।

2.स. हृदय रेखा जिस पर्वत को छूती हुई या स्पर्श करती हुई आगे की ओर जाती है या वहीं -हजयुक जाती है, तो ऐसी हालत में पर्वत विशेष का गुण हृदय में अधिक पाया जाता है।

3.अ. यदि हृदय रेखा मस्तिष्क रेखा में पूरी तरह शामिल हो जाय, तो उस आयु में हृदय की स्वतंत्र ईकाई नष्ट हो जाती है और हृदय मस्तिष्क को प्रभावित करता है।

3.ब. जब कई सूक्ष्म रेखायें नीचे से चलकर हृदय रेखा पर धावा बोल दें तो व्यक्ति प्रेम का जाल इधर उधर फेंकता फिरता है। निरन्तर किसी को प्रेम न करके वे व्यभिचारी बन जाते हैं। 

3.स. यदि हृदय रेखा चैड़ी और श्रृंखला युक्त हो तथा शनि क्षेत्र से शुरु हो तो वह स्त्री या पुरुष विपरीत लिंग के प्रति आकर्षित नहीं होता तथा एक दूसरे को घृणा की दृष्टि से देखता है। 

4.अ. हृदय रेखा लाल और चमकीले रंग की होने पर व्यक्ति को हिंसात्मक वासना (बलात्कार) पूर्ति के लिए उत्सुक करती है।

4.ब. यदि बृहस्पति क्षेत्र से दोमुंही हृदय रेखा आती है तो व्यक्ति प्रेम के क्षेत्र में उत्साही, इमानदार और सच्चे दिल का स्वामी होता है।

4.स. हृदय रेखा शाखाहीन और पतली होने से व्यक्ति रुखे स्वभाव का होता है तथा उसके प्रेम में गरिमा नहीं होती।

5.अ. यदि हृदय रेखा है पर बाद में फीकी पड़ जाय तो प्रेम में भीषण निराशा का सामना होता है। जिस कारण वह हृदय हीन और प्रेम विमुख हो जाता है।

5.ब. हृदय रेखा पर क्रास या नक्षत्र का निशान होने से हृदय गति प्रभावित होती है। 5.स. हृदय रेखा बुध पर्वत के नीचे से निकल कर शनि पर्वत के नीचे तक जाते-ंउचयजाते समाप्त हो जाये, तो ऐसा व्यक्ति प्रेम के मामले में धोकेबाज होता है।

5.द. बुध पर्वत के नीचे से निकलकर गुरु पर्वत के नीचे तक आती हुई प्रतीत हो तो ऐसा व्यक्ति प्रेम के मामले में धैर्यवान होता है तथा पत्नी को महत्त्व देता है और ईश्वर से डरने वाला तथा विशुद्ध प्रेम का पुजारी होता 
है।





सौजन्य  . सरल हस्तरेखा पुस्तक 

Friday, December 4, 2015

Wednesday, November 25, 2015

हस्तरेखा में मणिबंध रेखा का परिचय


मणिबन्ध

हाथ के मूल भाग में कलाई के ऊपरी भाग में मणिबन्ध होता है यह कई रेखाओं की सहायता से घुमावदार रेखा होती है।

मणिबन्ध में तीन बल होने से लम्बी आयु का पता चलता है तथा तीन से अधिक रेखायें होने से शुभ नहीं माना जाता है।

अ मणिबन्ध में अनेक खण्ड होने से व्यक्ति कंजूस होता है तथा समाज में सामान्य श्रेणी की स्थिति होती है।

ब मणिबन्ध एक रेखा की हो तो अल्पायु सम-हजयना
चाहिए।


स-  मणिबन्ध की प्रथम रेखा वलयकार और छोटे द्वीप हों तो व्यक्ति अपने पराक्रम से सफल होता है।

अ- तीन रेखाओं का मणिबन्ध हो तथा उसमें त्रिभुज हो तो बृद्धावस्था में परायी सम्पत्ति या धन मिलता है।

ब- पहला मणिबन्ध हथेली में ऊपर की ओर धनुषाÑति हो जाय तो संतान प्रतिबन्धक योग बनता है।

स- जंजीरनुमा होने से व्यक्ति मेहनती होता है।

अ- मणिबन्ध से कोई रेखा चन्दz पर्वत की ओर जाये तो व्यक्ति नौसेना या हवाई सेना में जाने का इच्छुक होता है।

ब- मणिबन्ध रक्त वर्ण की हो तथा जंजीरनुमा होने से व्यक्ति वाचाल होता है तथा आर्थिक हानि होती है।
स- मणिबन्ध अधूरी हो तथा कुछ रेखायें टूटकर शुक्र पर्वत पर जाये तो आजीविका में कुछ कठिनाई होती है।

अ- दो मणिबन्ध चौड़े और मोटे हों तो व्यक्ति को परिवार की चिंता रहती है तथा स्थान बदलने से पैसा कमा सकता है। ऐसे व्यक्ति अच्छी आय करते हैं पर स्वयं के पास कुछ नहीं होता।

ब- तीन मणिबन्ध कहीं से भी टूटे हुए न हों तो व्यक्ति किसी तकनीकी ज्ञान में दक्ष होता है। इनमें कुछ जल्दबाजी एवं दूसरे की भलाई की भावना होती है। 

स- मणिबन्ध से आयु रेखा को काटने वाली रेखा जन्म स्थान से दूर मृत्यु कराती है।

अ- मणिबन्ध की कोई रेखा बुध पर्वत तक जाने से अनायास धन प्राप्ति होती है।

ब-  मणिबन्ध से निकल कर कोई रेखा सूर्य स्थान तक जाने से व्यक्ति को दूसरे की मदद से
लक्ष्मी प्राप्त होती है तथा सुखी रहता है।



सौजन्य  - सरल हस्तरेखा पुस्तक 

Hastrekha Vigyan Aur Kartal

हस्तरेखा में दुर्घटना रेखा का परिचय

दुर्घटनायें


  •  शनि तथा मंगल पर्वत पर तारक चिह्न चन्द्र पर्वत के मध्य में एक रेखा
  • हाथ के सिरे की ओर आती हुई-ंउचयपशुओं से दुर्घटना।
  •  निकृष्ट हाथ में शुक्र पर्वत के निचले भाग पर रेखा के पास वर्ग-ंउचयकारावास
  • की सूचक।
  •  लहरदार, नीचे को -हजयुकती हुई मस्तिष्क रेखा साथ में त्रिकोण के पास
  • क्रास-ंउचयघातक दुर्घटना।
  •  मस्तिष्क रेखा और त्रिकोण पर क्रास-ंउचयअति गम्भीर दुर्घटना।
  •  मस्तिष्क रेखा शनि पर्वत के नीचे टूटी हुई, साथ में रेखा पर लाल
  • धब्बे-ंउचयसिर पर चोट।
  •  शुक्र पर्वत से एक रेखा शनि पर्वत को यदि उस रेखा की शाखायें हो
  • तो यह घातक सिद्ध होगी। मस्तिष्क रेखा सूर्य पर्वत के नीचे टूटी हुई-ंउचय
  • चैपाओं (चार पैर वाले जानवर) से दुर्घटना।



सौजन्य  - सरल हस्तरेखा पुस्तक 

Hastrekha Vigyan Aur Accident - Hastrekha Shastra Aur Durghatana

हस्तरेखा में मंगल रेखा का परिचय

मंगल रेखा


हस्त रेखा शास्त्र में मंगल ग्रह सूक्ष्म एवं आतंकपूर्ण है, इसका महत्व भाग्य
रेखा एवं सूर्य रेखा से कम नहीं हैं। जीवन रेखा टूटने या भंग होने पर
व्यक्ति को मंगल रेखा ही खतरों से बचाती है।

मंगल का स्थान हृदय और मस्तिष्क रेखा की सीमा रेखाओं से वेष्टित है।
यहां कोमल मांसल गद्दी के समान उभरा हुआ होता है। यदि यह क्षेत्र
पूर्णतः विकसित होता है तो व्यक्ति मेधावी, बौद्धिक, शक्ति सम्पन्न, निर्भीक
एवं ज्योतिष आदि विषयों में रुचि वाला, तर्क, कानून, न्याय का पुजारी
होता है। यदि मंगल के साथ अन्य समान्तर रेखाएं हों तो व्यक्ति सौभाग्यशाली होता है। यही रेखा शुक्र क्षेत्र की ओर -हजयुकी होने पर व्यक्ति के अन्दर तामसिक प्रवृत्त उत्पन्न करती है। यह क्षेत्र अवनत, दोषी अविकसित होने पर व्यक्ति को विधर्मी, पापकर्मी, राजदण्डभोगी और मर्यादाहीन बनाता है।

यही रेखा हृदय में स्फूर्ति शरीर में शक्ति और ओज का संचार करती है।
तथा आन्तरिक क्षमता और जीवन प्रदान करती है।

मंगल के साथ भी समान्तर रेखायें बलिष्ठ और लम्बी हों तो व्यक्ति को
कामी और शराबी बना देती है और वह अपनी आदम शक्ति का दुरुपयोग
करने लग जाता है। इस स्थिति में मंगल मंगलकारी नहीं रह जाता। अपनी
क्रूरता और उग्रता के कारण मंगल-ंउचयगुरु और शुक्र के सद्गुणों से भी
प्रभावित नहीं होता।



सौजन्य  - सरल हस्तरेखा पुस्तक 

Hastrekha Vigyan Aur Mangal Rekha

हस्तरेखा और त्रिभुज चिन्ह

त्रिभुज


हाथ में केवल अशुभ लक्षण देखकर किसी निर्णय पर पहुँच जाना अनुचित है। मानव हाथ में गौण एवं मुख्य रेखाओं के साथ-ंउचयसाथ अनेक प्रकार के चिह्न भी पाये जाते हैं जिनमें मुख्यतः विन्दु, क्रास, वर्ग, जाल, तारे (स्टार) त्रिभुज, वृत्त, द्वीप, मत्स्य, पेड़, धनुष, कमल, सर्प आदि हैं।

तीनों ओर से परस्पर मिली हुई रेखाएँ त्रिभुज कहलाती हैं, गहरी रेखाओं से निर्मित त्रिभुज शुभ फलदायी होता है। वैसे तो त्रिभुज बहुत कम हाथों में पाये जाते हैं। यह जितना ज्यादा बड़ा होगा, उतना श्रेष्ठ एवं फलदायी
माना जाता हैं। जिस व्यक्ति के हाथ के मध्य में त्रिभुज होगा।

वह सद्गुणी, 
सच्चरित्र वाला, भाग्यवान, क्रियाशील, ईश्वर में आस्था रखने वाला और
उन्नतिशील होता है। ऐसा व्यक्ति शान्त एवं मधुरभाषी, तथा धीर-ं2 गम्भीर होता है। त्रिभुज जितना बड़ा होगा, व्यक्ति उतना ही विशाल हृदय तथा कठिनाईपूर्वक सफलता प्राप्त करने वाला व्यक्ति होता है तथा आत्मविश्वास कम होता है। यदि बड़े त्रिभुज में एक ओर छोटा त्रिभुज बन जाये तो वह अवश्य ही उच्च पद को प्राप्त करता है।

मंगल क्षेत्र पर निर्दोश त्रिभुज होने से व्यक्ति धैर्यवान, रणकुशल तथा वीरता के लिए राष्ट्रीय पुरष्कारों से सम्मानित होता है, युद्ध में वह अपूर्व वीरता दिखलाता है। मुसीबत में भी अपने लक्ष्य से विचलित नहीं होता। ऐसा व्यक्ति सेना का कोई बड़ा आफीसर हो सकता है। किन्तु दूषित त्रिभुज होगा तो व्यक्ति निर्दयी और कायर होगा।

बुध क्षेत्र पर त्रिभुज होने से सफल वैज्ञानिक या अच्छा व्यापारी होता है। उसका व्यापार देश-ंउचयविदेश में फैला होता है तथा ये दूसरे की कमजोरीसम-हजयने में माहिर होते हैं। 

गुरु क्षेत्र में ़ित्रभुज होने से व्यक्ति चतुर, कार्य में दक्ष, कुशाग्र बुद्धि वाला एवं सदैव उन्नति की आकांक्षा वाला होता है।

ऐसे व्यक्ति धूर्त एवं सफल कूटनीति वाले भी होते हैं। लोगों को अपने प्रभाव में रखने की कला इनमें खूब होती है त्रिभुज में दोष होने पर व्यक्ति घमण्डी, बातूनी तथा स्वयं की तारीफ करने वाला होता है।

शुक्र क्षेत्र में निर्दोश त्रिभुज होने से व्यक्ति का आंशिक मिजाज, सरल तथा सौम्य स्वभाव का स्वामी होता है। ऐसे व्यक्ति ललित कला, संगीत, नृत्य आदि में रुचि रखने वाले होते हैं। दूषित त्रिभुज होने से व्यक्ति को कामान्ध बनाता है। अगर स्त्री के हाथ में ऐसा त्रिभुज होगा, तो वह परपुरुष गामिनी होती है। 

शनि क्षेत्र पर निर्दोष त्रिभुज होने से व्यक्ति तंत्र-ंउचयमंत्र साधना में दक्ष एवं गुप्त विद्या तथा वशीकरण का ज्ञाता होता है। दोषपूर्ण त्रिभुज होने पर व्यक्ति को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का ठग एवं धूर्त बनाता है।

हृदय रेखा पर यह चिह्न होने से लेखन कार्य में ख्याति प्राप्त होती है।

भाग्य रेखा पर होने से भाग्योन्नति में बाधाएं आती हैं।

चन्द्र रेखा पर होने से विदेश यात्रायें होती हैं।

विवाह रेखा पर होने से विवाह में बाधा होती है।

आयु रेखा पर होने से दीर्घायु मिलती है।

सौजन्य  - सरल हस्तरेखा पुस्तक 

हस्तरेखा और वर्ग चिन्ह

वर्ग


हाथ में केवल अशुभ लक्षण देखकर किसी निर्णय पर पहुँच जाना अनुचित है। मानव हाथ में गौण एवं मुख्य रेखाओं के साथ-ंउचयसाथ अनेक प्रकार के चिह्न भी पाये जाते हैं जिनमें मुख्यतः विन्दु, क्रास, वर्ग, जाल, तारे (स्टार) त्रिभुज, वृत्त, द्वीप, मत्स्य, पेड़, धनुष, कमल, सर्प आदि हैं।

चार भुजाओं से घिरे हुए क्षेत्र को वर्ग कहते हैं। कुछ लोगों के मत से इसे समकोण भी कहा जाता है। जब एक सुविकसित वर्ग से होकर भाग्य रेखा निकल रही हो तो व्यक्ति के भौतिक जीवन में यह संकट का द्योतक है।

जिसका सम्बन्ध आर्थिक दुर्घटना या हानि से है। परन्तु वर्ग को पार करकेआगे ब-सजय़ती हुई भाग्य रेखा खतरा नहीं उत्पन्न करती। जब वर्ग रेखा सेबाहर हो तथा स्पर्श मात्र हो एवं शनि पर्वत के नीचे हो तो यह दुर्घटना से रक्षा का सूचक है।

जब मस्तिष्क रेखा सुनिर्मित वर्ग से निकलती है तो यह स्वयं मस्तिष्क की
शक्ति और सुरक्षा का चिह्न माना जाता है। जब वर्ग मस्तिष्क रेखा के ऊपरउठ रहा हो और शनि के नीचे हो तो सिर में किसी प्रकार के खतरे का सूचक है।

हृदय रेखा किसी वर्ग में प्रवेश करने से प्रेम के कारण भारी संकट का सामना करना पड़ता है।

जब जीवन रेखा वर्ग में से गुजरती हो तो यह इस बात का सूचक है कि उस आयु पर व्यक्ति की दुर्घटना होगी, परन्तु मृत्यु से रक्षा होगी। 

शुक्र पर्वत

पर होने से काम संवेगों के कारण संकट से रक्षा होती है, ऐसी स्थिति में व्यक्ति काम वासना केे कारण अनेक तरह के खतरे में पड़ता है, लेकिन हमेशा बच निकलता है।

वर्ग जीवन रेखा के बाहर हो तथा मंगल क्षेत्र से आकर जीवन रेखा को छू रहा हो, तो इस स्थान पर वर्ग के होने से कारावास या भिन्न प्रकार का रहन सहन होता है।

जब वर्ग किसी भी पर्वत पर होता है तो उस पर्वत के गुणों के कारण होने वाले किसी भी अतिरेक से रक्षा का सूचक होता है।

गुरु पर होने से व्यक्ति की आकांक्षा से उसे रक्षा प्रदान करता है। 

शनि पर होने से खतरों से रक्षा करता है। 

सूर्य पर होने से प्रसिद्धि की इच्छा को ब-सजय़ाता है।

चन्द्र पर होने से अधिक कल्पना एवं अन्य रेखा के दुष्प्रभाव से
बचाव होता है। 

मंगल पर होने से शत्रुओं से होने वाले खतरों से बचाता है। 

बुध पर होने से उद्विग्नता एवं चंचल वृत्ति से बचाता है।



सौजन्य  - सरल हस्तरेखा पुस्तक

Sunday, November 15, 2015

Palm Image of Beggars-Poor Girl-Child Indian Palmistry






There is no particular sign of beggar or begging in palmistry but if there are too many Rahu Lines (worry lines), criss-cross/zig zag lines all over hand, absent of Fate Line and absent of Sun Line or defected Fate Line and Sun Line (cuts by many horizontal lines, broken, islanded, etc) indicates lack of fortune, debts and hurdles in whole life.

Also if Head Line and Life Line are joined at the beginning and both are very very much defected, this indicates subject born in poor family or severe health problems after birth. 

Thursday, October 22, 2015

Totka For Good Health


Best Herbal Home Remedies




Health powder
Mix amla powder--300 gms with dried ginger powder 100gms. Take one teaspoonful of this powder with water once in the morning and once in the evening





Green juice for health and weight loss
Palak, methi,lettuce (salad patta),green dhania, phudina, tulsi, kheera, tomato,simla mirch, gajar, amla fresh or amla powder
NOTE: - ANY OTHER GREEN VEGETABLE ALSO CAN BE ADDED

Arthrites
  • One part of honey, two parts of luke warm water, one teaspoon of cinnamon powder. Make a paste and massage.
  • Daily morning and evening take one cup of warm water with two teaspoons of honey and one teaspoon of cinnamon powderc
  • One tablespoon of honey, half teaspoon of cinnamon powder before breakfast regularly

Colds
Take one tablespoon of luke warm honey with ¼ tea spoon of cinnamon powder daily for three days. This will cure chronic cough & cold and clear the sinus

For gas and stomach
  • Mix ½ teaspoon saunf, ½ teaspoon dhania, 5nos kali mirch, 5nos lasun, 5nos tulsi, ½ teaspoon adrak. Boil in 1-1/2 cups of water for five minutes, strain and add one teaspoon honey when warm and take twice a day after meals.
  • Make a mixture of the following, grind and have one teaspoon after meals with water
  1. 200 gms of Saunf. Roast 100gms
  2. 250 gms of mishri
  3. 10 gms of black pepper
  4. 10 gms of haldi
  5. 10 gms of Mulethi
  6. 10 gms of bara elachi
  7. 10 gms of ginger powder


Asthama
  • Onion juice mixed with Ginger juice, black pepper, honey and salt helps control problems of throat, tonsils, lungs and asthma.
  • 10 drops of lasun juice with two teaspoons of honey can cure asthma
  • Taking 40/50 gms of roasted channa in the evening followed with hot milkclears the phlegm in the bronchial chords

Insomnia
  • One teaspoon of onion juice mixed with milk or honey taken at bedtime will induce sleep.
  • 20/30 gms of dhania leaves and 20/30 gms of mishri boiled in water taken at bedtime daily induces sleep.
  • Taking fresh coconut water ( dhaab) before going to bed induces sleep

High Blood Pressure
  • 6 drops of Lasun juice in some water reduces hypertension.
  • Taking carrot juice mixed with palak juice in 3:1 proportion regulates blood pressure.


Diabetes
  • Carrot juice mixed with Karela juice daily in the morning helps in secretion of insulin in the body.
  • Kheera juice half a glass taken in the morning also helps in controlling blood glucose levels.

Rheumatism
  • Carrot juice mixed with beetroot juice in equal quantity gives instant relief.
  • Taking 10 gms of Saunth( ginger powder) boiled in 100 gms of water with gur for one month cures arthritis.
  • Taking fresh amla juice with cow ghee heated to luke warm , regularly for a few days relieves stiffness of joints and helps in curing gout.

Cancer
  • Druva grass juice contains chlorophyll, proteins and mineral salts. Druva juice removes toxins from the body. Take juice three times a day.
  • Take 100gms of carrot juice with little turmeric powder twice a day along with meals.
  • Mix 300gms of Amla powder + 100gms of Ginger powder + 25 gms of Black till + 25 gms of methi powder. Take on empty stomach ,every morning, one tablespoon of above mixture in one glass lukewarm water and add half teaspoon honey into it.
  • Every night put 15/20 black kismis ( rasins) in a glass of water for soaking overnight. In the morning before breakfast churn entire quantity in a mixer , filter it and drink it sip by sip. During season fresh grape juice can be consumed twice a day.
  • Wheat grass juice, contains lactrile B12 ( which is anticancer), vitamin E, riboflavin, thiamin, niacin and many minerals. Take 50ml fresh wheat grass juice in 100 ml water with one teaspoon of honey twice a day. This is considered the number one treatment for Cancer. Many dieticians call this the GREEN BLOOD.


How To Cultivate Wheat Grass
  • Take 5 nos one foot round FLOWER pots, or deep sided baking tray, or plastic tray and lay down a thin layer ( about 1 cm thick) of moss. Top this with 2cms of ordinary soil.
  • Take 50 nos of untreated wheat and plant the seeds as evenly as possible in the first pot on day 1.On day two plant 50nos wheat seeds in pot 2 and so on so that you have sufficient quantity for many days. Water it with can, or a spray nozzle.
  • After 10/12 days when the grass has grown to 10/15 cms high and is deep green, cut a little quantity, wash it and grind it in a juice maker and filter the juice to get 50Ml.
  • Note: Wheat grass juice must be drunk fresh within one half hour of making it since it looses its minerals and effectiveness after two hours.

Cancer
  • Druva grass juice contains chlorophyll, proteins and mineral salts. Druva juice removes toxins from the body. Take juice three times a day.
  • Take 100gms of carrot juice with little turmeric powder twice a day along with meals.
  • Mix 300gms of Amla powder + 100gms of Ginger powder + 25 gms of Black till + 25 gms of methi powder. Take on empty stomach ,every morning, one tablespoon of above mixture in one glass lukewarm water and add half teaspoon honey into it.
  • Every night put 15/20 black kismis ( rasins) in a glass of water for soaking overnight. In the morning before breakfast churn entire quantity in a mixer , filter it and drink it sip by sip. During season fresh grape juice can be consumed twice a day.
  • Wheat grass juice, contains lactrile B12 ( which is anticancer), vitamin E, riboflavin, thiamin, niacin and many minerals. Take 50ml fresh wheat grass juice in 100 ml water with one teaspoon of honey twice a day. This is considered the number one treatment for Cancer. Many dieticians call this the GREEN BLOOD.


Digestive Problems And Acidity
  • Lemon juice with luke warm water helps in cleaning of bowels.
  • Taking juice of carrots, cabbage and tomatoes in equal proportion daily cures all problems of the intestines.
  • Half cup of Phudina juice mixed with one teaspoon of honey taken regularly after dinner for one month usually solves all types of digestive problems.
  • Buttermilk with little black pepper is very good remedy for indigestion.
  • Licking one teaspoon of amla powder with honey or ghee after dinner checks acidity.
  • Ajwain seeds soaked in lime juice after meals helps in digestion

Anaema
  • Take sweetened amla pickle with honey added to it.
  • Take sprouted mung and channa at breakfast.
  • 250 ml of carrot juice with spinach juice increases red blood corpuscles.

Eyesight
  • Taking half cup of dhania leaves mixed with one teaspoon of amla powder improves eyesight.


Jaundice
  • A mixture of sugarcane juice, lemon juice and raddish juice hasens recovery.
  • Half cup of fresh karela juice with water twice a day cures jaundice.

Urinary Tract Infection
  • 10 gms of amla powder with 2 gms of turmeric powder and 5 gms of honey taken daily for two to three weeks will cure infections.
  • Take a little roasted heeng dissolved in water for relief in burning sensation of urine.

Mesuration Problems
  • To regulate menses take ripe papita daily.
  • Onion juice mixed with gur taken regularly helps in curing mensturial disorders.
  • Dhania powder with boiled rice water checks excessive bleeding and pain during menses.
  • Taking 3 gms of amla powder with 6 gms of honey everyday for one month cures Leucorrhoea.
  • 6 gms of ajwain with hot milk regulates menstrual flow.
  • Taking heeng during menses relieves a number of symptoms.


Weak Memory
  • After eating 5/6 almonds take carrot juice with milk everyday in the morning to sharpen memory.
  • Mix one cup mango juice with one cup milk. Add one teaspoon ginger juice and sugar to tase daily to eleminate mental weakness.

Impotencey
  • Keep 200 gms of Lasun mixed with 500 gms of pure honey in a bottle and place the bottle in a sack of wheat for 21 or 31 days. Taking 10 gms of this paste followed by drinking lukewarm milk early in the morning for 21 days will give extraordinary strength and cures impotency.
  • Taking raddish regularly helps in getting lost sexual power.

Enlarged Spleen


  • Taking 10 ml lemon juice mixed with 6 ml onion juice morning and evening helps in curing enlarged spleen.
  • Soak 5 khajurs in a glass of water overnight. In the morning churn it in a mixie and add half teaspoon honey and drink it.
  • Add half teaspoon of rai powder to half glass of karela juice and drink itevery morning and evening to reduce enlarged liver and spleen.


This article was originally posted on http://www.altmedicenter.com










Friday, October 16, 2015

Monday, October 12, 2015

हाथ में तीनो मुख्य रेखाओं का दोषयुक्त होना - हस्तरेखा


यदि किसी व्यक्ति के हाथ में तीनो मुख्या रेखाएं ( जीवन  रेखा, मस्तक रेखा और हृदय रेखा ) खराब हो तो ऐसा व्यक्ति सदेव चिंतित, निराश व बीमार रहता है  ।

ऐसे व्यक्ति को कोई न कोई रोग लगा ही रहता है । ऐसे व्यक्ति के परिवार में भी सदेव कलह का वातावरण बना रहता है । व्यापार और नौकरी में भी ऐसे व्यक्ति को कोई खास सफलता नहीं मिलती है । ऐसे व्यक्ति अम्लपित्त, पेट का रोग, शारीरिक कमज़ोरी इत्यादि रोग से ग्रस्ति रहते है । यदि हाथ में सूर्य रेखा व भाग्य रेखा अच्छी है तो ऐसे व्यक्ति दूसरो के सहारे सफलता प्राप्त कर लेते है ।  

Sunday, October 11, 2015

मणिबंध रेखाओं का रहस्य - हस्तरेखा ( Manibandh Rekha Hast Rekha)



तीन मणिबंध रेखा  होने पर व्यक्ति स्वस्थ जीवन व लम्बी आयु प्राप्त करता है (हाथ में बाकी योग भी अच्छे होने चाहिए) । ऐसा व्यक्ति महान योगी व साधक होता है । ऐसे व्यक्ति की भगवन में अधिक आस्था होती है ।

यदि मणिबंध की प्रथम रेखा ऊपर की तरफ मुड़ कर महराब की आकृति बना ले तो ऐसे औरत को गर्भ धारण ( गर्भवती होने में समस्या ) करने में बहुत समस्या आती है । ऐसी औरत या पुरुष को कोई न कोई गुप्त रोग होता है जिसकी वजह से प्रजनन में समस्या आती है ।  ( नितिन कुमार पामिस्ट )

यदि जीवन रेखा सीधी है या जीवन रेखा पर बड़ा द्वीप है और मणिबंध पर भी द्वीप है तो ऐसे व्यक्ति को पितृ दोष होता है और ऐसे व्यक्ति को हर कार्य में अड़चने आती है । ( नितिन कुमार पामिस्ट ) ऐसे व्यक्ति का कोई भी काम आसानी से नहीं होता है । परिवार या वंश भी नहीं पनपता है ।   

हाथ में दोहरी जीवन रेखा - हस्तरेखा (Double Lifeline On Hand Palmistry)


दोहरी जीवन रेखा


हाथ में जीवन रेखा के साथ एक-दूसरी समानान्तर जीवन रेखा भी देखने में आती है। कई बार यह रेखा पूरी की पूरी जीवन रेखा के साथ चलती है और कभी आरम्भ से शुरू होकर कुछ समय तक या मध्य से आरम्भ होकर कुछ समय तक रहती है।


फल कहने से पहले हमें भली-भाँति निर्णय कर लेना चाहिए कि जिस रेखा का हम फल बता रहे हैं, वह वास्तव में जीवन रेखा ही है। इस दूसरी जीवन रेखा की मोटाई मुख्य जीवन रेखा जैसी ही होती है। (चित्र-40)



हाथ में दोहरी जीवन रेखा -  हस्तरेखा (Double Lifeline On Hand Palmistry)

हाथ में दोहरी जीवन रेखा -  हस्तरेखा (Double Lifeline On Hand Palmistry)
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दोहरी जीवन रेखा यदि यह निर्दोष है तो जीवन में सुख, शान्ति, धन, प्रतिष्ठा देती है तथा खतरों से रक्षा करती है। इस दशा में यदि हाथ का आकार चौडा, भारी व मांसल हो तो विपुल धन, सम्पति प्राप्त होती है। नितिन कुमार पामिस्ट ऐसे व्यक्ति जीवन में असाधारण उन्नति करने वाले व अपने पूरे परिवार के लिए वरदान सिद्ध होते हैं। यदि जीवन रेखा अन्त में दोहरी हो तो जिस आयु में दोहरी जीवन रेखा का समय आता है, व्यक्ति उन्नति करना शुरू करता है। यदि जीवन रेखा आरम्भ में अन्दर की ओर दोहरी हो तो उस रेखा के समाप्त होने के पश्चात् ही मनुष्य जीवन में उन्नति कर सकेगा और यदि जीवन रेखा के भीतर की और अन्त में जीवन रेखा दोहरी हो । तो दोहरी जीवन रेखा का समय आरम्भ होने पर ही अधिक उन्नति होती है।

ऐसी जीवन रेखा सन्तान उत्पति में बाधक होती है। दोनों जीवन रेखाएं मिलकर यदि F-40 एक बड़ा द्वीप बनाती हैं तो स्वयं या कोई रिश्तेदार हवाई दुर्घटना से बचता है। दोनों हाथों में ऐसा हो तो यह स्वयं के साथ घटित होती है। यदि जीवन रेखा अन्त में दोनों और से दोहरी हो तो व्यक्ति की किसी से व्यापार में सहयोग मिलता है या ऐसे व्यक्ति किसी दूसरे के आश्रित रहकर पलते हैं। अन्त में ऐसे व्यक्ति बहुत धनी हो जाते हैं तथा दूसरे के ही द्वारा बढ़ते हैं। दोहरी जीवन रेखा वाले व्यक्ति विवाह के बाद तरक्की करते हैं।

यदि इनकी भाग्य रेखा मस्तिष्क रेखा पर रूकी हो तो यह कई बार विदेश यात्रा भी करते हैं, नहीं तो विदेश यात्रा का फल इनकी सन्तान को होता है। दो से अधिक जीवन रेखा होने पर व्यक्ति सफल तो अधिक होता है, लेकिन उसके जीवन में अधिक अड़चनें और खतरे आते हैं। दो जीवन रेखाओं में से एक यदि बृहस्पति व एक मंगल से निकले तो व्यक्ति दो स्वभाव का पाया जाता है, जैसे क्रोधी एवं स्वाभिमानी, लेकिन प्राय: देखने में आता है, ये बहुत चालाक होते हैं। दोहरी जीवन रेखा वाले व्यक्ति कुलीन होते हैं व जीवन भर अपने कुल की मर्यादा को आंच नहीं आने देते हैं। तीन जीवन रेखाएं होने पर स्वाजातीय प्रतिष्ठित वश में पैदा होते हैं। बात अधिक करते हैं तथा क्रोधी प्रकृति के होते हैं। दोहरी जीवन रेखा वाले व्यक्ति स्वास्थ्य की अधिक परवाह करते देखे जाते हैं। इसी कारण यह अधिक वासना पसन्द करते हैं। जीवन रेखा और हृदय रेखा दोनों ही दोहरी हों तो व्यक्ति को जीवन साथी से अधिक प्रेम होता है और इनका जीवन साथी सुन्दर होता है।

 स्वयं का स्वभाव बहुत क्रोधी व जीवन साथी सीधा और मलीन और मेहनती होता है। ऐसे व्यक्ति अपने जीवन साथी को देवता के समान मानते हैं और उसके बिना एक दिन भी नहीं रह सकते। चित्र-41 उसकी मृत्यु के बाद यह बहुत जल्दी ही मर जाते हैं। यदि जीवन रेखा में किसी प्रकार का दोष नहीं है तो बच्चे बिल्कुल भी लापरवाह नहीं होते। इनके किसी बच्चे के दांत पर दांत है। दांत पर दांत होना भाग्यशाली होने का चिन्ह माना जाता है। ऐसे बच्चे इस तरह उन्नति करते हैं कि परिवार में इनका नाम होता है। इनमें किसी प्रकार की गन्दी आदत नहीं होती। दोहरी जीवन रेखा वाले व्यक्तियों के एक से अधिक आय के साधन पाये जाते हैं। दोनों जीवन रेखाओं में से यदि किसी एक जीवन रेखा में दोष हो और दूसरी जीवन रेखा में कोई दोष न हो तो स्वास्थ्य तथा घन सम्बन्धी विपत्ति आती है, लेकिन बिना किसी विशेष कष्ट दिये टल जाती है।

यदि दोनों ही जीवन रेखाएं एक ही समय में दोषपूर्ण हों तो परिस्थिति सचमुच सोचनीय होती है, साथ ही मस्तिष्क रेखा में भी इस समय में दोष होने पर गम्भीरता से सोचने की आवश्यकता होती है। उस समय व्यक्ति के ऊपर अवश्य ही बड़ी विपत्ति आती है, परन्तु दोहरी जीवन रेखा का स्वभाव खतरों से रक्षा करना है। अत: ऐसे व्यक्ति धैर्य से उस समय को काट जाते हैं। दोहरी जीवन रेखा में एक लाल या काली हो तो उस व्यक्ति को शराब की आदत होती है। ऐसा व्यक्ति शराब का अत्याधिक आदी होता है।

Friday, August 7, 2015

Online Free Palmistry Articles

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Question: I want to get palm reading done by you so let me know how to contact you?


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Answer: You will get your full detailed palm reading report in 9-10 days to your email ID after receiving the fees for palm reading report.



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Answer: You will receive your palm reading report by e-mail in your e-mail inbox.



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Answer: Yes, gemstone recommendation is also included in this reading.


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Client's Feedback - May 2018



If you don’t have your real date of birth then palmistry is there to help you for future life predictions.  Our palm lines, signs, mounts and shapes which are very useful in predicting the person’s life. We can predict your future from the lines and signs of your both palms. We can predict your future by studying your palm lines and signs. There is no need to send us your date of birth , time of birth , place of birth etc . Palm told the personality ,future ups and downs thus a experienced palmist can guide you to deal with upcoming challenges with vedic remedies.