Friday, December 20, 2013




Sheikh Nasser Al-Mohammad Al-Sabah Palmistry





Aung San Suu Kyi Palmistry





Acharya Mahaprajna Palmistry





Surya South Actor Palmistry





Muhammad Ali Palm Image Palmistry





Muhammad Ali Death, Muhammad Ali punch





Hand Image Of Evender Hollyfield Atmore, Alabama, United States




Catherine Zeta Jones Palmistry

a psychic told me i was going to get pregnant

Monday, December 16, 2013




Ali Ahsan Mohammad Mojaheed Death Penalty Palmistry


Friday, December 6, 2013




हस्तरेखा में घमण्डी व्यक्ति का हाथ



यदि व्यक्ति के हाथ में गुरु पर्वत सामान्य से ज्यादा उभरा हुआ है तो ऐसा व्यक्ति घमण्डी और मुफठ होता है ! (1)

यदि व्यक्ति के हाथ में मस्तक रेखा गुरु पर्वत से निकल रही हो तो ऐसा व्यक्ति घमण्डी होता है ! (2)

यदि व्यक्ति के हाथ में गुरु कि ऊँगली सामान्य से ज्यादा लम्बी हो ऐसा व्यक्ति अहंकारी होता है ! (3)


Hastrekha Aur Ego  - Hast Rekha Aur Guru Parvat

Thursday, December 5, 2013




हस्तरेखा विज्ञान और ससुराल


ऐसे में लाभ की बात हर कोई चाहता है, तो क्यों न इस मौके पर गर्लफ्रैंड और ससुराल से लाभ की भी बात हो जाए। ससुराल पक्ष से आपको लाभ मिलेगा कि नहीं यह जानने के लिए आप अपनी हथेली को गौर से देखिए।

हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार अगर आपकी हथेली में अंगूठे के पास से कोई रेखा चलकर मध्यमा उंगली तक पहुंच जाए और उसका शिरा तर्जनी उंगली की ओर मुड़ा हुआ है तो इसका मतलब है आपको ससुराल पक्ष से समय-समय पर लाभ मिलता रहेगा।

माना जाता है कि जिनकी हथेली में ऐसी रेखा होती है उनकी तरक्की और सुख में ससुराल पक्ष का बड़ा योगदान होता है। ऐसी हस्तरेखा वाले व्यक्ति को गर्लफ्रैंड से भी खूब उपहार मिलता है। लेकिन गौर करने वाली बात यह भी है कि अगर शुक्र पर्वत अधिक उभरा या धंसा हुआ है तब बदनामी का भी सामना करना पड़ता है।

भाग्य रेखा कटी या जालीदार नहीं हो और तर्जनी उंगली के ऊपर हथेली में वर्ग की आकृति बनी होने पर भी व्यक्ति को ससुराल पक्ष से लाभ मिलता रहता है। ऐसे व्यक्ति की आर्थिक स्थिति अच्छी होती है। भौतिक सुख-सुविधाओं से भरपूर जीवन का आनंद मिलता है।

Hastrekha Vigyan Aur Sasuraal  - Bhagya Rekha Hastrekha 




हस्तरेखा विज्ञान में अनामिका उंगली





छोटी उंगली के बाद अनामिका होती है। इस उंगली के नीचे सूर्य पर्वत होता है इसलिए अनामिका उंगली को हस्तरेखा विज्ञान में काफी महत्व दिया गया है। हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार अनामिका अगर तर्जनी से बड़ी हो तो व्यक्ति स्वाभिमानी होता है। ऐसे लोग भावुक होते हैं और जरूरत के समय लोगों की मदद के लिए तैयार रहते हैं। सगे-संबंधियों विशेष तौर पर जीवनसाथी के प्रति इनमें गहरा लगाव होता है। सामान्य रूप से इनका दांपत्य जीवन सुखद रहता है। 


अनामिका और तर्जनी की लंबाई बराबर होना दर्शाता है कि व्यक्ति स्वतंत्रताप्रिय है। ऐसा व्यक्ति अपने काम में किसी का हस्तक्षेप पसंद नहीं करता है और न दूसरों के काम में दखलंदाजी करता है। यह अपने व्यक्तिगत जीवन में खुश रहते। जिनकी अनामिका उंगली मध्यमा के बारबार होती है वह स्वार्थी और धूर्त होते हैं। ऐसे लोग परंपरा और नैतिकता को ताक पर रखकर कई कार्य कर बैठते हैं। अनामिका उंगली का छोटा होना हस्तरेखा में अच्छा नहीं माना जाता है। 

जिनकी अनामिका उंगली छोटी होती है वह ठगी, चोरी एवं कला का गलत इस्तेमाल करके धन कमाने की प्रवृति रखने वाले व्यक्ति होते हैं। अनामिका उंगली का झुकाव छोटी उंगली की ओर होने पर व्यक्ति व्यवसाय के माध्यम से खूब धन अर्जित कर सकता है। जिनकी अनामिका उंगली का झुकाव मध्यमा उंगली की ओर होता है वह नौकरी एवं बौद्धिक कार्यों के द्वारा धन कमाते हैं। इस तरह के लोग निराशावादी और खिन्न होते हैं। ज्योतिष, दर्शन और रहस्यमयी विद्याओं से भी धन अर्जित करने में सफल होते हैं। 

Hastrekha Vigyan Aur Anamika Ungli



समुद्रशास्त्र में चिन्ह





अगर आप हाथ की लकीरों में अपनी किस्मत तलाश रहे है तो सिर्फ लकीरें नहीं बल्कि हाथेली में मौजूद शुभ चिन्हों को ढूंढने की कोशिश कीजिए। समुद्रशास्त्र में बतया गया है कि भले ही भाग्य रेखा छोटी हो लेकिन हथेली में शुभ चिन्ह मौजूद हों तो छोटी भाग्य रेखा वाला व्यक्ति भी वैभवपूण जीवन का आनंद लेता है।


समुद्रशास्त्र में बताया गया है कि जिनकी हथेली में मछली का चिन्ह होता है उन्हें चिंता और निराशाजनक बातों को मन से निकाल देना चाहिए। ऐसा व्यक्ति जीवन में निरंतर सफलता की ओर बढ़ता रहता है। इन्हें संतान सुख के साथ ही उत्तम धन वैभव की प्राप्ति होती है। यह जो भी काम करते हैं उनमें सफल होते हैं।

हथेली में अगर तुला या यज्ञ की वेदी के समान आकृति बनी हुई है तो यह व्यापार में उत्तम सफलता का प्रतीक चिन्ह माना गया है। ऐसा व्यक्ति नौकरी से अधिक व्यवसाय में सफल होता है। जिनकी हथेली में खड्ग, धनुष, वाण अथवा बर्छी का चिन्ह होता है वह युद्घ कला में निपुण होते हैं। ऐसे व्यक्तियों को सेना, पुलिस एवं रक्षा क्षेत्र में जल्दी कामयाबी मिलती है।

हथेली में पर्वत अथवा वृक्ष का चिन्ह होना बताता है आप पर सदैव लक्ष्मी की कृपा रहेगी। ऐसा व्यक्ति खूब धन कामाता है। पैसा कितना भी खर्च करे, धन की कमी इन्हें कभी नहीं सताती है। हथेली में शंख आथवा जहाज का चिन्ह होना जल क्षेत्र से जुड़े व्यवसाय एवं नौकरी से लाभ का सूचक होता है।

Shamudrashastra Aur Hateli Par Chinha 



हस्तरेखा विज्ञान मे नपुंसकता



हर व्यक्ति की चाहत होती है कि उनका दांपत्य जीवन सुखद रहे। लेकिन कई कारणों से दांपत्य जीवन में परेशानी एवं मतभेद बढ़ जाता है और पति-पत्नी अलग तक हो जाते हैं। इनमें एक बड़ा करण है सेक्स की इच्छा में कमी या पौरूष का अभाव।

हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार जिस पुरूष की हथेली में शुक्र पर्वत बहुत अधिक दबा हुआ होता है उनमें पौरूष शक्ति की कमी होती है। ऐसे व्यक्ति में सेक्स की इच्छा की कमी रहती है। जबकि शुक्र पर्वत का अधिक उभरा हुआ होना व्यक्ति को कामी बना देता है।

शुक्र पर्वत हथेली में अंगूठे के नीचे जीवन रेखा से घिरा होता है। इस स्थान पर वृत चिन्ह यानी गोल आकृति होने पर व्यक्ति अत्यधिक कामुक होता है। इनके अनैतिक संबंध भी हो सकते हैं।

इस स्थान पर द्वीप चिन्ह होने पर पारिवारिक जीवन में ताल-मेल की कमी रहती है। दांपत्य जीवन में अक्सर वाद-विवाद होता रहता है। जबकि शुक्र पर्वत पर त्रिभुज का आकार होना बड़ा ही शुभ माना जाता है।

इस तरह की आकृति जिनकी हथेली में होती है वह धन संपन्न एवं प्रतिष्ठित होते हैं। इन्हें भौतिक सुख-सुविधाएं एवं पूर्ण दांपत्य सुख मिलता है।

Hastrekha Shastra Aur Namardangi  - Hastrekha Aur Napunsakta

Wednesday, December 4, 2013




हथेली का रंग हस्तरेखा


हथेली का रंग व उसके प्रकार
लाल रंगः इस रंग की हथेली वाले लोग जीवन में समस्त ऐश्वर्य को भोगते हैं। इन्हें नाना प्रकार के सुख और आनंद प्राप्त होते हैं। ये लोग प्रचुर धन के स्वामी होते हैं। स्वभाव से ये भावुक और क्रोधी होते हैं। ये लोग वैचारिक रूप से अस्थिर होते हैं।

गहरा गुलाबीः इस तरह की हथेली वाले सामान्यतः धनी होते हैं। ये लोग क्रोधी व तुनक मिजाज भी होते हैं। इनकी बुद्धि स्थिर नहीं होती। ये जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं और जल्दी नाराज भी हो जाते हैं। इनके विचार, सोच, पसंद, नापसंद सब कुछ परिवर्तनशील होते हैं। इन्हें मध्य आयु तक हाई ब्लड प्रेशर की समस्या घेर लेती है।

हल्का गुलाबीः ये लोग उत्तम मानवीय गुणों से संपन्न, धनी व ऐश्वर्यशाली होते हैं। इनके अंदर गजब का उत्साह पाया जाता है। धैर्य इनमें कूट-कूट कर भरा होता है। दया, क्षमा और प्रेम इनके स्वभाव का मूल आधार है। ये लोग आशावादी व प्रसन्नचित्त होते हैं। ये लोग कला एवं प्रकृति प्रेमी होते हैं।

पीलाः ये लोग दृढ़ विचारों वाले नहीं होते। मानसिक रूप से परेशान व निराशावादी होते हैं। स्वभाव में मधुरता की कमी होती है। इन्हें पैरों के रोगों से कष्ट प्राप्त होता है। आलस्य के कारण प्रगति नहीं कर पाते। इनके जीवन में संघर्ष होता है।

बैगनी या नीलाः नीले या बैगनी रंग की हथेली वाले निराशावादी होते हैं। इनके जीवन में संघर्ष की अधिकता होती है। ये लोग एकान्त वाली होते हैं। इन्हें रक्त विकार से कष्ट प्राप्त होता है। मद्यपान सहित अन्य व्यसनों की ओर लगाव होने कार्यक्षमता व प्रतिभा नष्ट होने लगती है। ये लोग समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी से दूर रहते हैं। स्वभाव से ये लोग रूखे व चिड़चिड़े होते हैं।

मटमैला रंगः काले, भूरे या मटमैले रंग की हथेली वाले लोग कर्मठ नहीं होते। ये लोग बेहद रहस्यवादी होते हैं। बातचीत में असत्य तथ्यों का सहारा लेते हैं। पुरुषार्थ की कमी होती है। इनका व्यक्तित्व निस्तेज होता है। स्वास्थ्य की समस्याओं से घिरे रहते हैं ये लोग। इनके चेहरे पर उदासी का भआव होता है। धन की कमी बनी रहती है। इन्हें रक्त व कफ संबंधी समस्याएं प्राप्त होती हैं।

निस्तेज सफेदः सफेद हथेली के लोग उत्साहहीन व एकांत प्रिय होते हैं। मानसिक शक्ति की कमी होती है। ये लोग बहुत कर्मठ नहीं होते।

चमकदार सफेदः चमत्कारी श्वेत हथेली वाले लोग अलौकिक शक्तियों के स्वामी होते हैं। इन्हें पराशक्ति का ज्ञान होता है। विचारों से ये बेहद संतुलित होते हैं। इनकी विचारधारा आध्यात्मिक होती है। ये लोग शांति के दूत होते हैं। ये लोग स्वस्थ रहते हैं।

Hastrekha Shastra Aur Hateli Ka Rang



कर पृष्ठ और सामुद्रिक शास्त्र




सामुद्रिक शास्त्र में जहां करतल(हथेली), करतल की रेखाएं, उंगलियां और नाखून का सूक्ष्म अध्ययन किया जाता है, वहीं कर पृष्ठ यानी हथेली के पिछले हिस्से का भी गहन विश्लेषण किया जाता है। इसके आकार-प्राकर से व्यक्ति की क्षमता, योग्यता, स्वभाव, गुण, अवगुण की विवेचना की जाती है। कर पृष्ठ की बनावट, उभार और प्राकर का सामुद्रिक शास्त्र में बहुत महत्व है।

अर्थात् यदि कर पृष्ठ सर्प के फन के आकार का हो यानी उसमें थोड़ा उभार हो तो, कर पृष्ठ रोम यानी रोयें से रहित हो, मांस से युक्त हो तथा मणिबंध से उच्च हो तो ऐसे हाथ वाला व्यक्ति शुभ फल प्राप्त करता है। ऐसे लोग उत्तम गुणों से युक्त होते हैं।

सांप के फन के आकार के कर पृष्ठों को श्रेष्ठ माना गया है।

राजाओं व कुलीन लोगों के कर पृष्ठ उच्च, घन के आकार वाले,स्निग्ध(चिकने) व नस रहित होते हैं। प्राचीन ग्रंथों में उभरे हुए कर पृष्ठ को श्रेष्ठ तो माना गया है लेकिन सिर्फ उच्च होना पर्याप्त नहीं है। इसके अलावा भी कई शुभ चिन्हों और प्रकार का वर्णन प्राप्त होता है।




विवर्ण यानी रंगहीन (फीके रंग के), सूखे, रोयें वाले, बिना मांस के, खुरदुरे, मणिबंध के स्तर के मणिबंध से निम्न कर पृष्ठ श्रेष्ठ व शुभ फल प्रदान नहीं करते। स्कंद पुराण में कहा गया है कि जिन स्त्रियों के कर पृष्ठ रोम वाले, बेडौल, नसयुक्त और बिना मांस के हों उनका जीवन दुखी और संघर्षमय होता है।

रोम (रोयें): कर पृष्ठ पर रोम यानी छोटे-छोटे बाल का न होना शुभ लक्षण है। यदि कर पृष्ठ रोम रहित होता है तो व्यक्ति भाग्यशाली, ऐश्वर्यवान, सक्षम, योग्य व सफल होता है। कर पृष्ठ पर यदि छोटे-छोटे व मृदु रोम पाए जाएं तो यह शुभ फल में कुछ कमी तो करेगा फिर भी भविष्य बेहतर होगा। मृदु रोम वाले व्यक्ति बहुत थोड़े संघर्ष के साथ पर्याप्त सुख भोगते हैं। पर यदि कर पृष्ठ पर कड़े बाल यानी लंबे और कड़े रोम संघर्ष में वृद्धि कर भाग्य के शुभ प्रभाव में बेहद कमी का संकेत देते हैं। ऐसे लोगों का भाग्य साथ नहीं देता। इन्हें पूरी तरह से कर्म पर निर्भर होना पड़ता है।

नसः कर पृष्ठ पर हरे, सफेद या किसी भी रंग की नसों का दिखना शुभ नहीं होता। सदैव नस विहीन कर पृष्ठ ही शुभ फल प्रदान करते हैं।

निम्न कर पृष्ठः मणिबंध से निम्न कर पृष्ठ बेहद अशुभ होते हैं। कर पृष्ठ पर गड्ढे जैसी स्थिति भी श्रेष्ठ फल नहीं देती। यह जीवन में संघर्ष, संकट, उदासी, उत्साहहीनता व धन की कमी का स्पष्ट संकेत है।

उच्च कर पृष्ठः उच्च कर पृष्ठ समस्त सुख प्रदान करने वाले होते हैं। इस तरह के कर पृष्ठ वाले जीवन में समस्त वैभव व आनंद को भोगते हैं। ये लोग भाग्यशाली, ऐश्वर्यवान, शक्तिशाली व भू पति होते हैं।

समतल कर पृष्ठः मणिबंध के स्तर के कर पृष्ठ शुभ और अशुभ दोनों फल देते हैं। यदि बीचों-बीच कर पृष्ठठ अंदर की तरफ दबे होते हैं तो यह धन हानि व रोग का संकेत है। पर यदि कहीं-कहीं कर पृष्ठ मणिबंध से ऊपर की ओर हैं तो यह स्थिति छोटे-छोटे लाभ की ओर इशारा करती है।


Hastrekha Vigyan Aur Kar Prishth






हस्तरेखा और आपका व्यवसाय



ज्योतिष शास्त्र के द्वारा जातक की कुंडली के बारह भावों, उनमें स्थित ग्रहों और राशियों की स्थिति, उनकी युति, आपसी दृष्टि संबंध आदि से भूत, भविष्य और वर्तमान के बारे में सटीक जानकारी मिल सकती है। उसी प्रकार सामुद्रिकशास्त्र यानी हस्तरेखा विज्ञान में भी व्यक्ति की हथेली में स्थिति रेखाएं, विभिन्न पर्वत, चिन्ह, नाखून, अंगूठे और अंगुलियों की सहायता से व्यक्ति के सम्पूर्ण जीवन के बारे में जाना जा सकता हैं। हस्तरेखा विज्ञान के द्वारा व्यक्ति के करियर के बारे में भी अध्ययन कर यह पता लगाया जा सकता है कि वह भविष्य में किस क्षेत्र में जाएगा। 

डॉक्टर : जिस हथेली में बुध पर्वत स्पष्ट उभरा हो और इस पर्वत पर तीन या चार रेखाएं खड़ी हो, कनिष्ठिका अंगुली अनामिका के तृतीय पर्व को स्पर्श करे, तो व्यक्ति चिकित्सा के क्षेत्र में जाता है। इनके साथ यदि मंगल पर्वत भी उभरा हुआ हो तो सफल सर्जन बनता है। सूर्य रेखा स्पष्ट हो तो चिकित्सक बनकर सफलता, प्रसिद्धि पाता है।

अभिनेता : जिस व्यक्ति के हाथ की सभी अंगुलियां कोमल और ढलवा हों, अनामिका अंगुली अधिक लम्बी न हो, सूर्य तथा शुक्र पर्वत उभरे हों, सूर्य और भाग्य रेखा निर्दोष हो तो ऎसा व्यक्ति सफल अभिनेता बनता है।

राजनेता : जिस व्यक्ति की दाहिनी हथेली में केले का या ध्वज का चिन्ह हो तो वह राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री पद तक पाने में सफल होता है। हथेली में सूर्य रेखा पर वृत्त, चतुर्भज का चिह्न हो, एक शाखा मंगल पर्वत पर और दूसरी मस्तिष्क रेखा से मिले व पर्वतों का उभार ठीक हो तो ऎसा व्यक्ति मंत्री, प्रधानमंत्री पद तक पहुंचता है।

उच्च अधिकारी : जिस व्यक्ति की हथेली में कनिष्ठिका, अनामिका अंगुली का तीसरा पोर स्पर्श करे या उससे ऊपर निकल जाए, सूर्य पर्वत स्पष्ट उभार लिए हो साथ ही सूर्य रेखा गहरी हो, सूर्य पर्वत पर त्रिभुज, चतुर्भज, वृत्त या नक्षत्र का चिह्न हो तो ऎसा व्यक्ति आईएएस पद प्राप्त करता है। जिन हाथों में कनिष्ठिका, अनामिका के तृतीय पर्व को स्पर्श करे, मंगल पर्वत या जीवन रेखा से कोई रेखा निकलकर सूर्य पर्वत को स्पर्श कर ले तो जातक उच्च अधिकारी बनता है।

शिक्षक: जिस व्यक्ति की मस्तिष्क रेखा स्पष्ट, गहरी तथा भाग्य रेखा व सूर्य रेखा भी हो और गुरू पर्वत उभरा हुआ हो तो वह शिक्षक होता है।

इंजीनियर: इंजीनियरिंग का मूल कारक ग्रह शनि होता है। जिस व्यक्ति के हाथ में शनि पर्वत उभरा हुआ हो तथा इस पर्वत पर अनेक खड़ी रेखाएं हो साथ ही भाग्य रेखा शनि पर्वत पर आकर समाप्त हो तो व्यक्ति इंजीनियर बनता है। 

उद्योगपति: जिस व्यक्ति की हथेली में अंगूठा 90 डिग्री से अधिक कोण बनाए, कनिष्ठिका अंगुली लम्बी हो, मस्तिष्क रेखा स्पष्ट हो, बुध, सूर्य और शनि पर्वत उभरे हो तो जातक फैक्ट्री का मालिक, व्यापारी और उद्योगपति होता है।

Hastrekha Vigyan Aur Vyvasaay  - Hastrekha Mein Doctor, Engineer




उंगली और हथेली के पर्व हस्त रेखा विज्ञान


हाथ में चार 
उंगलियां होती हैं तथा प्रत्येक उंगली किसी एक ग्रह का प्रतिनिधित्व करती है।

· तर्जनी उंगली - गुरु

· मध्यमा - शनि


· अनामिका - सूर्य

· कनिस्ठिका - बुध

तर्जनी उंगली
यह उंगली व्यक्ति की महत्वाकांक्षा, अहम एवं नेतृत्व की क्षमता को दर्शाती है। इस उंगली से व्यक्ति के भाग्य एवं कार्य क्षेत्र के बारे मे जानकारी मिलती है। तर्जनी उंगली की सामान्य लंबाई मध्यमा के ऊपरी भाग के मध्य तक होती है। यदि यह उंगली सामान्य से अधिक लंबी होती है तो व्यक्ति में नेतृत्व की क्षमता बहुत होती है। इसके विपरीत इसके छोटे होने पर व्यक्ति सामान्यत: दूसरों के मार्गदर्शन में ही कार्य करता है या वह अकेले की कार्य करना पसंद करता है तथा स्वयं का ही कुछ कार्य करता है। इस उंगली का लंबा होने पर व्यक्ति का गुरु प्रबल होता है।

यदि तर्जनी उंगली सामान्य से अधिक लंबी हो, तो व्यक्ति में लापरवाही और तानाशाही बढ़ जाती है। जब यह छोटी हो तो व्यक्ति में ये विशेषताएं लुप्त होती हैं। यदि यह उंगली विकृत है तो व्यक्ति चालाक, स्वार्थी और पाखंडी होता है।

जब तर्जनी उंगली का पहला खंड लंबा हो तो व्यक्ति राजनीति, धर्म, और शिक्षण क्षेत्रों में कुशल होते हैं। यदि उंगली का दूसरा खंड लंबा हो तो व्यक्ति व्यापारी होता है और उंगली का तीसरा खंड लंबा हो तो ऐसे व्यक्ति विभिन्न प्रकार के व्यंजन के शौकीन होते हैं।

गुरु पर्वत तर्जनी उंगली से नीचे होता है। पूर्ण विकसित गुरु पर्वत वाले व्यक्ति लोक नेतृत्व की आकांक्षा, नीति से पूर्ण एवं स्वाभिमानी होते हैं। ऐसे व्यक्ति शासन एवं नेतृत्व में कुशल होते हैं। विकसित गुरु पर्वत व्यक्ति को महत्वाकांक्षी बनाता है। यह लोग धन से अधिक अपने ओहदे को महत्व देते हैं। ऐसे लोग अच्छे सलाहकार होते हैं। यह लोग कानून के दायरे में रह कर कार्य करते हैं। ऐसे लोग अनेक तरह के व्यंजन खाने के शौकीन होते हैं और अपने परिवार से मोह करते हैं।

अधिक विकसित गुरु पर्वत व्यक्ति को अहंकारी, दिखावटी, क्रूर और इर्ष्यालु बनाता है। ऐसे लोग अधिक खर्चीले होते हैं।

यदि गुरु पर्वत अर्द्धविकसित हो तो व्यक्ति में गुरु संबंधित बुनियादी प्रवृत्ति विकसित नहीं होती है।

मध्यमा उंगली
इस उंगली को शनि की उंगली भी कहा जाता है तथा यह व्यक्ति की सचाई, ईमानदारी एवं अनुशासन को दर्शाती है। यदि यह उंगली सामान्य लंबाई की होती है यानि अन्य उंगलियों से लंबी परंतु बहुत अधिक लंबी नहीं तो व्यक्ति जिम्मेदार एवं गंभीर व्यक्तित्व का धनी होता है एवं महत्वाकांक्षी होता है। यदि यह उंगली सामान्य से अधिक लंबी हो तो वह व्यक्ति अकेले में रहना पसंद करता है। तथा वह व्यक्ति किसी गलत कार्य मे भी फंस सकता है। जिस व्यक्ति कि मध्यमा उंगली छोटी होती है वह व्यक्ति लापरवाह एवं आलसी होता है।

यदि शनि की उंगली का प्रथम खंड लंबा हो तो व्यक्ति का झुकाव धार्मिक ग्रंथ और रहस्यवादी कला के अध्ययन की ओर होता है। यदि मध्यमा का द्वितीय खंड लंबा हो तो व्यक्ति का व्यवसाय संपत्ति संबंधी, रसायन, जीवाश्म ईंधन या लोहा मशीनरी से संबंधित होता है, जब तीसरा खंड लंबा हो तो दर्शाता है कि व्यक्ति चालाक, स्वार्थी और दुराचार में युक्त रहता है।

शनि पर्वत मध्यमा उंगली से नीचे होता है। शनि पर्वत दार्शनिक विचारों को दर्शाता है। शनि पर्वत पूर्ण विकसित होने पर व्यक्ति ज्ञानी, गंभीर एवं विचार शील होता है। वह सोच-विचार कर कुछ कार्य आरंभ करता है एवं उसकी इंद्रियां उसके नियंत्रण में रहतीं हैं।

अनामिका
इस उंगली को अपोलो रिंग या सूर्य कि उंगली कहा जाता है। यह उंगली व्यक्ति की प्रसिद्धि की इच्छा, बुद्धिमत्ता एवं रचनात्मक क्षमता को दर्शाती है। यदि यह उंगली तर्जनी उंगली से अधिक लंबी हो तो यह उंगली सामान्य से अधिक लंबी होती है। इस प्रकार के व्यक्तियों मे जोखिम उठाने की अद्भुत क्षमता होती है। ये रचनात्मक क्षमता के धनी होते हैं। इनका संबंध फैशन या फिल्म क्षेत्र से भी हो सकता है। जिनकी अनामिका उंगली तर्जनी से छोटी होती है वे अपनी स्थिति से संतुष्ट होते हैं तथा उनमें अधिक नाम एवं प्रसिद्धि की इच्छा नहीं होती है। तर्जनी उंगली से छोटी अनामिका उंगली बहुत कम हाथों में पाई जाती है।

सूर्य पर्वत अनामिका उंगली के नीचे होता है। सूर्य पर्वत उन्नत हो तो सफलता का प्रतीक होता है। ऐसे व्यक्ति यश एवं प्रतिष्ठा से संतृप्त होते हैं। परिश्रम एवं कुशाग्र बुद्धि से जीवन मे सफलता प्राप्त करते हैं। ऐसे व्यक्ति भौतिक एवं व्यसायिक क्षेत्रों मे सफल होते हैं। वह धार्मिक होता है परंतु धर्मांध नहीं होता है। वह अपनी योग्यता एवं अयोग्यता को भली भांति जानता है। शीघ्र क्रोध करता है एवं शीघ्र ही शांत भी हो जाता है।

कनिष्ठिका
इस उंगली को बुध की उंगली कहा जाता है। इस उंगली के माध्यम से व्यक्ति की वाकपटुता, ज्ञान, बुद्धि एवं चातुर्य का पता चलता है। यदि इस उंगली की ऊंचाई अनामिका उंगली के प्रथम भाग का जहां अंत होता है वहां तक होती है तो इसकी लंबाई सामान्य है इससे छोटी होने पर यह सामान्य से छोटी मानी जाएगी। जिस व्यक्ति की कनिष्टिका सामान्य से छोटी होती है उनमें अभिव्यक्ति की क्षमता की कमी होती है तथा वे हीन भावना का शिकार होते हैं। उन्हें अपनी भावनाओं एवं शब्दों पर नियंत्रण नहीं होता है। उनके व्यवहार मे बचपना होता है तथा जब यह उंगली सामान्य से अधिक लंबी होती है तब व्यक्ति की अभिव्यक्ति की क्षमता अद्भुत होती है। उनका आई क्यू सामान्य से अधिक होता है तथा वे अच्छे लेखक एवं वक्ता साबित होते हैं। कनिष्ठिका उंगली का निचला भाग मोटा होने पर व्यक्ति विलासिता पूर्ण एवं आरामदायक जीवन जीना पसंद करता है।

बुध पर्वत कनिष्ठिका के नीचे होता है। बुध पर्वत पूर्ण उन्नत होने पर व्यक्ति प्रखर बुद्धि, गंभीर विचार, आकर्षक भाषण एवं लेखन शैली का धनी होता है। ऐसे व्यक्ति व्यवसाय एवं विज्ञान क्षेत्रों मे सफल होते हैं। ऐसा व्यक्ति प्रत्येक शक्तिशाली कार्य क्षेत्र मे विजयी होता है। नानाविध कार्य वह कुशलता पूर्वक सम्पन्न करता है।

हाथ का अंगूठा
हाथ का अंगूठा किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देता है। हाथ का अंगूठा व्यक्ति की इच्छा शक्ति एवं जीवन शक्ति दर्शाता है। हाथ के अंगूठे के मुख्यतः दो भाग होते हैं। प्रथम भाग इच्छा शक्ति एवं द्वितीय भाग उस व्यक्ति की तर्क क्षमता दिखाता है। अंगूठे का द्वितीय भाग प्रथम भाग से बड़ा होना चाहिए क्योंकि कोई भी निर्णय तर्क से लिया जाना ही उचित होता है। हाथ का अंगूठा बिलकुल सीधा हो तो वह व्यक्ति कठोर एवं जिद्दी होता है। ऐसे व्यक्तियों पर विश्वास किया जा सकता है परंतु इनका स्वभाव जिद्दी होने से इनके अधिक मित्र नहीं बन सकते हैं। अत्यधिक लचीले अंगूठे वाले व्यक्ति खर्चीले होते हैं एवं इन पर आसानी से विश्वास नहीं किया जा सकता है। स्वभाव में लचीलापन होने से इनके बहुत मित्र होते हैं परंतु ये किसी ज़िम्मेदारी का कार्य अधिक कार्य कुशलता से करने में समर्थ नहीं होते हैं क्योंकि इन का किसी एक निर्णय पर डटा रहना बहुत कठिन होता है।

यदि हाथ का अंगूठा केवल 60 डिग्री का कोण खुलते समय बनाता है तो वह व्यक्ति समझदार एवं कार्यकुशल होता है। यदि 90 डिग्री का कोण बनाता है तो व्यक्ति अपने कार्य में जोखिम उठाने की क्षमता रखता है परंतु सदैव विवेकपूर्ण निर्णय लेता है। यदि हाथ का अंगूठा 90 डिग्री से 120 डिग्री तक खुलता है तो व्यक्ति बिना सोचे-समझे अत्यधिक जोखिम उठा सकता है। जिस व्यक्ति का अंगूठा कटि के आकार को होता है वह तर्क-वितर्क में निपुण होता है परंतु शारीरिक रूप से कुछ कमजोर हो सकता है।

अंगूठे का अग्र भाग यदि कोनिकल हो तो व्यक्ति बुद्धिमान एवं रचनात्मक क्षमता से परिपूर्ण होता है। ऊपर से चौड़ा अंगूठा होने पर व्यक्ति जिद्दी होता है। अंगूठे का अग्र भाग यदि चौकोर हो तो व्यक्ति कानून का ज्ञाता होता है तथा वास्तविकता को ध्यान मे रख कर निर्णय लेता है।

यदि हम अंगूठे को अलग कर दे तो चार उंगलियों के कुल बारह भाग होते हैं। ये बारह भाग बारह राशियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। तर्जनी उंगली के ऊपरी भाग से गिनती आरंभ करने पर मेष राशि तर्जनी उंगली के प्रथम भाग , वृष राशि तर्जनी उंगली के मध्य भाग एवं मिथुन राशि तर्जनी उंगली के निम्न भाग पर आएगी। इसी प्रकार कर्क राशि मध्यमा के प्रथम भाग, सिंह राशि मध्य भाग एवं कन्या राशि निम्न भाग पर आएगी। अनामिका के प्रथम भाग पर तुला राशि, मध्य भाग पर वृश्चिक एवं अंतिम भाग पर धनु राशि होगी एवं कनिष्ठिका के प्रथम भाग पर मकर राशि, मध्य भाग पर कुम्भ एवं अंतिम भाग पर मीन राशि होगी।

इसी प्रकार हथेली मे सात पर्वत होते हैं। ये सात पर्वत सात ग्रहों का प्रतिनिधित्व करते हैं। हाथ का बढ़ा हुआ मास पिंड करतल पर पर्वत के स्वरूप को धारण करता है। करतल पर पूर्ण विकसित पर्वत व्यक्ति के उच्च चरित्र निर्माण मे सहायक होते हैं। अधोगत पर्वत व्यक्ति के उच्च गुणों को संकुचित करता है।

मंगल पर्वत
मंगल पर्वत के दो स्थान हैं। पहला स्थान जीवन रेखा के ऊपरी स्थान के नीचे एवं दूसरा इसके विपरीत हृदय रेखा एवं मस्तिष्क रेखा के बीच में स्थित है। पहला स्थान शारीरिक अवस्था तथा दूसरा स्थान मानसिक अवस्था का द्योतक है। साहस, बल एवं शक्ति आदि का आकलन प्रथम पर्वत से होता है। यदि मंगल का प्रथम क्षेत्र सुंदर एवं उन्नत हो तो व्यक्ति सेना में या इसी प्रकार के उच्च पद पर आसीन होता है। वह एक सफल अधिकारी सिद्ध होता है। दूसरे पर्वत से व्यक्ति के धैर्य, शौर्य, संयम, क्षमा आदि गुणों का पाता चलता है। पहला पर्वत शारीरिक क्षमता एवं दूसरा पर्वत मानसिक क्षमताओं को दर्शाता है। विकसित मंगल पर्वत वाले व्यक्तिओं के व्यक्तित्व अत्यंत प्रभावशाली होता है। ये लोग जल्दबाजी में निर्णय लेने और आक्रामक स्वभाव वाले होते हैं। मंगल ग्रह अगर विकसित हो तो लोग अक्सर आर्मी या सशस्त्र बल के साथ जुड़े होते हैं। ऐसे लोग अपने उद्देश्यों के प्रति दृढ़ संकल्प रहते हैं। इनका सबसे बड़ा दोष इनमें आवेग और आत्म नियंत्रण की कमी है। ऐसे व्यक्तियों को आत्म -नियंत्रण का अभ्यास करना चाहिए और सभी प्रकार की मदिरा और उत्तेजक पदार्थों से दूर रहना चाहिए। यदि मंगल पर्वत अधिक विकसित है तो व्यक्ति मे मंगल संबंधित विशेषताएं बढ़ती हैं। ऐसे लोग अत्यंत शक्तिशाली बन जाते हैं और अपनी शक्ति के द्वारा वह कमजोरों का शोषण करते हैं। अक्सर ऐसे लोग समाज विरोधी गतिविधियों जैसे चोरी, डकैती, लूट आदि मे शामिल होकर अत्यंत क्रूर बन जाते हैं। कम विकसित मंगल पर्वत व्यक्ति को कायर बनाता है। लेकिन वह बहादुर होने का दावा करता है। जब अवसर की मांग और समय आता है, तो वह अपने कदम वापस ले लेता है।

चन्द्र पर्वत
चन्द्र पर्वत हाथ में बुध पर्वत के नीचे चन्द्र पर्वत स्थित होता है। चन्द्र पर्वत पूर्णतः उन्नत होने पर व्यक्ति बहुत गुणवान एवं कल्पनाशील होते हैं। कल्पना के द्वारा ही वे अपनी प्रतिभा को नई दिशा देते हैं। ये लोग संगीत, काव्य, वस्तु, ललितकला आदि मे प्रवीण होते हैं। ऐसे लोग विपरीत परिस्थिति को भी अनुकूल बनाने का सामर्थ्य रखते हैं। पूर्ण विकसित चंद्र पर्वत व्यक्ति को कला प्रेमी बनाता है। ऐसे लोग कलाकार, संगीतकार, लेखक बनते हैं। ऐसे व्यक्ति मजबूत कल्पनाशक्ति के गुणी होते हैं। यह लोग अति रुमानी होते हैं लेकिन अपनी इच्छाओं के प्रति आदर्शवादी होते हैं। शुक्र पर्वत की तरह इनमें भावुकता या कामुकता वाला स्वभाव नहीं होता है।

पूर्ण विकसित चंद्र पर्वत व्यक्ति को भावनाओं में बहने वाला और किसी को उदास न देखने वाला होता है। प्रायः यह लोग वास्तविकता से परे कल्पना प्रधान और अच्छे लेखक और कलाकार होते हैं। प्रतिकूल परिस्थितियों में ऐसे लोग उन्मादी और तर्कहीन व्यवहार करते हैं। इसके अतिरिक्त ये निर्णय लेने में अधिक समय लेने वाले और अत्यधिक महत्वाकांक्षी होते हैं।

अति विकसित चंद्र पर्वत व्यक्ति को आलसी और सनकी बनाता है। ऐसे व्यक्ति कल्पना से पूर्ण और वास्तविकता से दूर रहते हैं। कभी कभी, यह एक हल्के रूप में विकसित हो कर एक प्रकार का पागलपन भी हो सकता है।

यदि चंद्र पर्वत अविकसित है, तो व्यक्ति मे अच्छी कल्पना का अभाव, दूरदर्शिता का अभाव, नए और रचनात्मक विचारों का अभाव रहता है, यह लोग क्रूर और स्वार्थी होते हैं।

शुक्र पर्वत
शुक्र पर्वत समान्यतः उच्च गुणों का बोधक है। इससे स्वास्थय, सौन्दर्य,प्रेम,दया,सहानुभूति आदि मनोभावों का ज्ञान होता है। इस पर्वत का अत्यधिक उन्नत होने पर व्यक्ति विलासी, कमी और व्यभिचारी भी हो सकता है।

हथेली पर अंगूठे के आधार पर स्थित पर्वत, शुक्र पर्वत कहलाता है। यह अनुग्रह, आकर्षण, वासना और सौंदर्य की उपस्थिति या अनुपस्थिति को दर्शाता है। यह प्रेम और साहचर्य की इच्छा और सौंदर्य की हर रूप में पूजा करने को भी दर्शाता है। अति विकसित शुक्र पर्वत लोगों को सुन्दर और विपरीत सेक्स के प्रति आकर्षित करता है। मित्रों का साथ इन्हें बहुत पसंद होता है। अच्छा कपड़ों एवं अच्छा खाने के शौकीन होते हैं। स्वभाव से स्पष्टवादी होते हैं। पूर्ण विकसित शुक्र पर्वत चुंबकीय व्यक्तित्व के धनी बनाता है ऐसे व्यक्ति विपरीत सेक्स के बीच लोकप्रिय होते हैं। ये लोग जिज्ञासु प्रवृत्ति के होते हैं लेकिन जब यह किसी से प्यार करते हैं तो उनके प्रति पूर्णतः समर्पित होते हैं।

हाथ पर अति विकसित शुक्र पर्वत व्यक्ति में इंद्रिय सुख की इच्छा प्रबल कर देता है। ऐसे लोग प्रेम संबंधों में स्वार्थी होते हैं और सदैव शारीरिक सुख की इच्छा रखते हैं। इसके विपरीत कम विकसित शुक्र पर्वत व्यक्ति को सुस्त एवं कठोर बनाता है। सौन्दर्य एवं भौतिकता के प्रति इनमे कम आकर्षण होता है।

Hastrekha Gyan Aur Parvat



अंगुष्ठ दर्पण हस्तरेखा



किसी भी काम को ठीक ढंग से पूर्ण करने के लिए हथेली में अंगूठा सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अंगूठे की मदद से ही हम किसी भी वस्तु पर अपनी पकड़ मजबूत बना सकते हैं। जिस प्रकार दैनिक कार्यों में अंगूठे का महत्व है, ठीक उसी प्रकार हस्तरेखा ज्योतिष में भी अंगूठे की अहमियत है।

हस्तरेखा ज्योतिष किसी भी व्यक्ति के स्वभाव और भविष्य को जानने की एक सटीक और प्रचलित विद्या है। हाथों की रेखाओं और हथेली की बनावट के साथ ही उंगलियों और अंगूठे की बनावट को देखकर भी इंसान के चरित्र की बातें मालूम की जा सकती हैं।


- इंसान का अंगूठा तीन भागों में विभक्त रहता है। प्रथम ऊपर वाला भाग यदि अधिक लंबा हो तो व्यक्ति अच्छी इच्छा शक्ति वाला होता है। वह किसी पर निर्भर नहीं होता। ऐसे अंगूठे वाले लोग किसी भी कार्य को पूरी स्वतंत्रता के साथ करना पसंद करते हैं और इन्हें सफलता भी प्राप्त हो जाती है।

- यदि किसी व्यक्ति की हथेली में अंगूठे के पहले पर्व पर बहुत सी खड़ी रेखाएं होती हैं तो वह ईमानदार और भरोसेमंद होता है।

- यदि अंगूठे के पहले पर्व पर आड़ी रेखाएं होती हैं तो व्यक्ति को जीवन में महालक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ऐसे लोगों को धन संबंधी कार्यों में कभी भी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता है।

- जिन लोगों की हथेली में अंगूठे के पहले पर्व पर तीन खड़ी रेखाएं होती हैं उनकी इच्छा शक्ति प्रबल होती है और इनका दिमाग भी बहुत तेज चलता है।

- जिन लोगों के हथेली के अंगूठे के पहले पर्व पर क्रॉस का निशान होता है वे बहुत अधिक खर्चीले होते हैं। ये लोग अधिक व्यय के कारण परेशानियों का सामना करते हैं।

- अंगूठा का मध्य भाग यदि अधिक लंबा हो तो व्यक्ति की तर्क शक्ति काफी उन्नत होती है। तर्क शक्ति के कारण इन लोगों का दिमाग भी काफी तेज चलता है। अपनी बुद्धि के बल पर इन्हें समाज में मान-सम्मान प्राप्त होता है।

- यदि अंगूठे के दूसरे पर्व पर गोलाकार निशान हो तो व्यक्ति बहुत अधिक बहस करने वाला होता है।

यदि किसी व्यक्ति की हथेली में अंगूठे के दूसरे पर्व पर तीन खड़ी रेखाएं होती हैं तो व्यक्ति की तार्किक शक्ति का अच्छी रहती है। जबकि यहां आड़ी रेखाएं होती हैं तो व्यक्ति कुतर्क करने वाला हो सकता है।

- यदि किसी व्यक्ति की हथेली में अंगूठे के दूसरे पर्व पर त्रिभूज का निशान बना हो तो व्यक्ति विज्ञान के क्षेत्र में कार्य करने वाला होता है।

- यदि किसी व्यक्ति की हथेली में अंगूठे के दूसरे पर्व पर जाली का निशान बना हो तो व्यक्ति चरित्र का अच्छा नहीं माना जाता है। सामान्यत: ऐसे लोग बेईमान भी हो सकते हैं।

- हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार जो लोग बुद्धिमान और चतुर होते हैं उनका अंगूठा सुंदर और आकर्षक होता है। ये लोग किसी भी काम को चतुराई के साथ पूर्ण करते हैं और लाभ भी कमाते हैं।

- अंगूठे का अंतिम भाग और शुक्र पर्वत (अंगूठे एकदम नीचे वाले भाग से लगा हुआ शुक्र पर्वत होता है।) के पास वाला भाग अधिक लंबा हो तो व्यक्ति अति कामुक होता है।

- ऐसे अधिकांश लोग जिनकी हथेली में अंगूठा छोटा, बेडोल और सामान्य से अधिक मोटा होता है, वे सामान्यत: असभ्य और दूसरों का निरादर करने वाले होते हैं। ऐसे लोग कई बार क्रूर भी हो जाते हैं और दूसरों को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।

- जिस व्यक्ति का अंगूठा सामान्य से ज्यादा लंबा और हथेली के साथ मजबूती से जुड़ा हुआ होता है वह सर्वगुण संपन्न होता है। इन लोगों में घर-परिवार और समाज के बीच घुल-मिलकर रहने के सभी गुण होते हैं। इन्हें उचित मान-सम्मान प्राप्त होता है।

- जो लोग अधिक कल्पनाशील होते हैं सामान्यत: उनकी हथेली में अंगूठा लचीला होता है। लचीला अंगूठा आसानी से पीछे की ओर मुड़ जाता है। ऐसे लोग अधिक खर्चीले भी होते हैं। इन्हें हर काम को कलात्मक ढंग से करना पसंद होता है।

- जो अपनी दोनों हथेलियों के अंगूठों को उंगलियों में दबाकर कर रखते हैं, ऐसे अधिकांश लोग डरपोक होते हैं। ऐसा करने वाले व्यक्ति में आत्म विश्वास की कमी होती है। ये लोग हर कार्य को डरते-डरते करता है। इन्हें कार्यों में सफलता मिलने में भी संदेह रहता है।

- हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार सामान्यत: जिन लोगों का अंगूठा अधिक मोटा होता है उनका स्वभाव अच्छा नहीं माना जाता है।

- चपटे अंगूठे वाले लोग निराशजनक स्वभाव वाले होते हैं। जबकि जिन लोगों के अंगूठे अधिक चौड़े होते हैं वे क्रोधी स्वभाव के होते हैं।
- जिन लोगों का अंगूठा बड़ा होता है वे कलात्मक स्वभाव के होते हैं और जिन लोगों का अंगूठा पतला होता है वे अपने स्वभाव के कारण घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान प्राप्त करते हैं।

हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार जिन लोगों की हथेली में सामान्य से छोटे अंगूठा होता है वे लोग निर्बल हो सकते हैं। ऐसे लोगों की कार्य क्षमता काफी कम होती है और हर कार्य को बहुत धीरे-धीरे करते हैं।

हस्तरेखा के अनुसार दोनों हाथों की गहराई से जांच करने के बाद ही सटीक भविष्यवाणी की जा सकती हैं। यहां बताए  गए अंगूठे के प्रभाव हथेली की अन्य स्थितियों से प्रभावित हो सकते हैं। अत: यह बात ध्यान रखने योग्य है।


Hastrekha Vigyan Aur Angootha - Hastrekha Angutha - Hastrekha Angoota


Monday, December 2, 2013




Saloni Ashwin South Actress Palm Image Palmistry







Pakistani Lollywood Actress Sanam Baloch Palmistry







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Hand of John Abraham Indian Palmistry




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Thursday, November 28, 2013




The Various Hand Types Palmistry



Wednesday, November 27, 2013




Markings On Hands Palmistry


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Friday, November 22, 2013




Kinnat Arora Palm Image Palmistry

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Tuesday, November 19, 2013




Hand Image Of Saif Al Islam Palmistry






Friday, November 15, 2013




Hand Image Of Famous Punjabi Film Director Ksshitij Chaudhary



















Ksshitij Chaudhary is an Indian Punjabi Film director.  His most notable films include  HEER RANJHA, YAARA O DILDARA, CHAKK DE PHATTE, JATTS IN GOLMAAL & MR & MRS 420.

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